
बड़वानी । जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के चलते मरीजों का आंकड़ा सामने आया है। जिसके तहत पता चला है कि जिले में इन दिनों बुखार, एलर्जी, पेट दर्द का प्रकोप बढ़ा है। गर्मी में सर्दी, जुखाम हो रहा है, यानी एलर्जी के मरीज बढ़े हैं।
हमारी टीम की पड़ताल में सामने आया है कि बढ़ती गर्मी के बीच महीनेभर में जिले के सभी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र में 30 हजार ओआरएस के पैकेट मरीज पी गए, साथ ही 90 हजार पैरासीटामॉल गोली खा गए। वहीं 2.20 लाख से अधिक रेनेटिडिन और एलर्जी मोंटीलुकास 3500 सिट्राजिन 1.10 लाख दवाइयों की वितरण और खपत हो गई। यह खपत सभी सीएचसीए पीएचसी की है जिला अस्पताल की खपत अलग है। जिले के सीएचसी और पीएचसी सेंटरों पर बुखार भी ठीक नहीं हो पा रहे हैं। उन मरीजों को भी जिला अस्पताल रैफर कर दिया जाता है, जिससे अतिरिक्त लोड बढ़ रहा है। जिले में एंटीबॉयोटिक की डिमांड भी बढ़ी है। गर्मी के मौसम में डायरिया और उल्टी के चलते मेट्रोनिडाजोल नॉरफूलॉक्सिन और ओआरएस की खपत बढऩे के साथ ही एंटीबॉयोटिक की डिमांड भी बढ़ी है। हर माह 1.40 लाख एंटीबायोटिकए 2.20 लाख रेनेटिडिन खा रहे मरीज।
स्टोर कीपर से सप्लाई की जानकारी के अनुसार शासन स्तर पर मिलने वाली इन दवाइयों में जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल में करीब 2 करोड़ रुपए की दवाइयां बंट जाती है। ओआरएस ग्लूकोज से लेकर एमोक्सीसीलिन टेबले, सेफ्टाइक्जोन इंजेक्शन, नॉर्मल सलाइन, महंगे हेपेटाइटिस बी के इमनोग्लोबिन, रैबीज के विशेष इंजेक्शन सहित हीमोफिलिया वाले इंजेक्शन इंदौर डिपो से आवश्यक होने पर मांग अनुसार यहां मिलते हैं। सभी को मिलाकर दवाइयों का बजट 2 करोड़ के पार पहुंच जाता है।
जिला अस्पताल सहित सिविल अस्पताल एवं सीएचसी पीएचसी सेंटर की सरकारी दवाइयों में महंगे हेपेटाइस इंजेक्शन के साथ ही इंसुलिनए सामान्य रैबीज 350 रुपए कीमत से लेकर गंभीर मात्रा में काटे हुए केस में इमनोग्लोबिन 1000 रूपए कीमत का रैबीज भी नि:शुल्क मिलता है। इसके अलावा 5 से 6 हजार रुपए कीमत का इंजेक्शन जो हीमोफिलिया बीमारी के लिए होता है। इसे रॉयल डिसिस कहा जाता है। यानी खून का थक्का नहीं जमने पर हीमोफिलिया होता है, इसमें फैक्टर की कमी हो जाती है, तो यह महंगा इंजेक्शन दिया जाता है। जिसमें हीमोफिलिया के मरीज कुछ ब्लॉक में हैं, दूसरे जिले धार के कुक्षी, मनावर से भी यहां मरीज पहुंचते हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल में कैंसर मरीजों के लिए कीमोथैरेपी की दवाइयां जो काफभ् महंगी है, नि:शुल्क दी जाती हैं।
जिले में गर्मी से डायरिया, पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसी कारण स्थिति यह है कि दवाइयों की खपत बढ़ी है। अधिकतर सेंटर से रैफर केसेस जिला अस्पताल आते हैं। आम तौर पर यहां बुखार, लू की चपेट वाले मरीज ही अधिक हैं। जिस कारण पेरासिटामॉल ओआरएस और एंटीबॉयोटिक की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
डॉ मनोज खन्ना, सिविल सर्जन, बड़वानी
दवाइयों की खपत पर नज़र
ओआरएस 30 हजार, पैरासिटामॉल 90 हजार, एंटीबायोटिक सेफ्ट्रिकजोन इंजेक्शन 3500, एमोक्सिसिलिन 250 एमजी में 40 हजार, एमोक्सिसिलिन 500 एमजी 20.5 हजार, सिफिक्जिम 8 हजार, सिप्रोफ्लॉक्सिन 250 एमजी 72 हजार, सीफोडॉक्सीम 2 हजार। हीमोफिलिया इंजेक्शन फैक्टर-8 आवश्यकता अनुसार इंदौर डिपो से मांग पर उपलब्ध। कीमोथैरेपी की दवाइयां केवल जिला अस्पताल में वितरण। कुत्ते एवं जानवर के गंभीर काटने पर इमनोग्लोबिन 145, हेपेटाइटिस बी इमनोग्लोबिन 50, रैबीज इंजेक्शन 197। एसिडिटी के लिए रेबेप्राजॉल 1.01 लाख, रेनेटिडिन 2.20 लाख। एलर्जी के लिए मोंटीलुकास 3.50 हजार, सिट्राजिन 1.30 लाख। उल्टी के लिए ओनडनसेटरन 37500। दस्त के लिए मेट्रोनिडाजोल 62.50 हजार, नॉरफलॉक्सिन 40.50 हजार।
