राजौरी में सेना के अभियान में 18 जवानों के मारे जाने का वीडियो फर्जी : सरकार

नयी दिल्ली ,03 जून (वार्ता) सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस वीडियो को फर्जी करार दिया है जिसमें जम्मू-कश्मीर के राजौरी ज़िले में सेना के एक अभियान के दौरान उसके 18 जवानों के मारे जाने का दावा किया गया है।यह फर्जी वीडियो ऐसे समय पर आया है जब सेना पिछले दस दिनों से भी अधिक समय से इस क्षेत्र में बड़ा आतंकवाद-विरोधी अभियान चला रही है।

फर्जी वीडियो में राजौरी में सेना के एक अभियान के दौरान धमाके और भारी गोलीबारी होते दिखाई गयी है। इसमें दावा किया गया है कि इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना कार्यालय पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक हैंडल से किये गये पोस्ट में इस वीडियो और इसमें किये गये दावे को फर्जी करार देते हुए कहा है कि इस वीडियो का जम्मू-कश्मीर से कोई लेना-देना नहीं है और इसे गलत जानकारी फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।

पीआईबी ने कहा ,” कई सोशल मीडिया अकाउंट एक वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि राजौरी में भारतीय सेना के एक ऑपरेशन के दौरान 18 जवानों की जान चली गई। यह दावा पूरी तरह से झूठा है।”

उसने कहा है कि यह वीडियो असल में यूरोप के माल्टा में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके का है। यह धमाका गत एक जून को हुआ था और इसका सेना के किसी भी सुरक्षा ऑपरेशन से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की सामग्री को ऑनलाइन आगे भेजने या शेयर करने से पहले, आधिकारिक माध्यमों से जानकारी की पुष्टि ज़रूर कर लें। इस बीच, सुरक्षा बलों का राजौरी ज़िले के मंजाकोट सेक्टर में स्थित गंभीर मुगलन और दोरीमल के जंगल के इलाकों में अपना व्यापक आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन जारी है।

इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ कोड-नाम दिया गया है। इसे भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है। यह ऑपरेशन इस क्षेत्र में संदिग्ध आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में मिली खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया है। इस ऑपरेशन के तहत, सुरक्षा कर्मियों ने ऊबड़-खाबड़ इलाके में अपनी निगरानी और तलाशी के प्रयासों को और तेज़ कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर चेकपॉइंट बनाए गए हैं, और सुरक्षा टीमें सत्यापन अभियान चला रही हैं, जिसमें यात्रियों और स्थानीय निवासियों की पहचान की जांच भी शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि घने जंगलों और मुश्किल पहाड़ी इलाकों के कारण ऑपरेशन में कई चुनौतियां आ रही हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों को पूरे इलाके की बहुत सावधानी से तलाशी लेनी पड़ रही है। इसके साथ ही एक मज़बूत सुरक्षा घेरा भी बनाए रखना पड़ रहा है, ताकि संदिग्धों को भागने का कोई रास्ता न मिल सके।

तलाशी अभियान को और मज़बूत बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल और निगरानी उपकरण भी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि उनके प्रयासों का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में मौजूद किसी भी आतंकवादी खतरे का पता लगाना और उसे खत्म करना है, साथ ही स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। यह इलाका अभी भी कड़ी सुरक्षा घेरे में है और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि तलाशी अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से साफ़ नहीं कर लिया जाता और सभी संभावित खतरों को समाप्त नहीं कर दिया जाता।

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