नयी दिल्ली, 03 जून (वार्ता) गैर सरकारी संगठन आह्वान फाउंडेशन ने सरकार, कृषि संस्थानों और निजी संगठनों को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी मिट्टी परीक्षण सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। संगठन ने कहा है कि जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और गांव स्तर पर प्रदर्शन जैसी पहलें किसानों को इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
हाशिये पर रहने वाले समुदायों के बीच काम करने वाले इस संगठन की एक विज्ञप्ति में आह्वान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक ब्रज किशोर प्रधान ने कहा, “ देश में कृषि भविष्य केवल बारिश और बीजों पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता पर भी आधारित है।देश के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले कई किसानों को आज भी इस तकनीक की पर्याप्त जानकारी नहीं है। छोटे और सीमांत किसान अक्सर मिट्टी परीक्षण की लागत या सुविधाओं की कमी के कारण इसका उपयोग नहीं कर पाते। ”
संगठन का कहना है कि मिट्टी परीक्षण जैसी उपयोगी तकनीक होने के बावजूद इसका उपयोग अभी भी कई क्षेत्रों में सीमित है। आज जब खेती मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और घटती उत्पादकता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब मिट्टी के स्वास्थ्य को समझना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
श्री प्रधान ने कहा कि मिट्टी परीक्षण का एक प्रमुख लाभ संतुलित उर्वरक उपयोग भी है। किसान अक्सर पारंपरिक तरीकों या अनुमान से खाद का उपयोग करते हैं, जिससे कभी अधिक तो कभी कम उर्वरक डाल दिया जाता है। मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कृषि विशेषज्ञ किसानों को सही फसल चयन, उर्वरक की उचित मात्रा, बुवाई का सही समय और मिट्टी सुधार के उपाय बताते हैं, जिससे खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनती है।
