RBI की मौद्रिक नीति बैठक शुरू: रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम, क्या EMI पर मिलेगी राहत या बढ़ेगा महंगाई का दबाव?

मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज से शुरू हो गई है। वैश्विक तनाव और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच आयोजित इस बैठक में लिए गए निर्णयों की घोषणा शुक्रवार, 5 जून को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। फिलहाल बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार मुख्य ब्याज दरों (रेपो रेट) में यथास्थिति बनाए रख सकता है, जिससे होम और कार लोन की EMI पर तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून को लेकर अनिश्चितता आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और खुदरा महंगाई में संभावित उछाल केंद्रीय बैंक को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहा है। ईंधन की कीमतों में वृद्धि और मानसून के कम रहने का सीधा असर आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ सकता है, जिसे नियंत्रित करना रिजर्व बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

आर्थिक विकास की रफ्तार को लेकर अलग-अलग एजेंसियों ने अपने अनुमान साझा किए हैं, जिनमें 6 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत तक की वृद्धि दर की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला साल 2026 की अंतिम तिमाही से पहले शुरू होने की गुंजाइश नहीं है। आम जनता के लिए फिलहाल सतर्कता जरूरी है, क्योंकि आरबीआई का रुख भविष्य में महंगाई को थामने के लिए सख्त बना रह सकता है।

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