नयी दिल्ली, 02 जून (वार्ता) राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डाॅ मीनेश शाह ने मंगलवार को कहा कि दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट इस सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती होने के साथ-साथ गंभीर चिंता का विषय है और इस समस्या से निटपने के लिए इस क्षेत्र में संगठित इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। डॉ शाह एनडीडीबी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी मदर डेयरी के लिए दूध पैकिंग की पर्यावरण अनुकूल थैली प्रस्तुत करने के अवसर पर यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मिलावट की समस्या से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल 30-35 प्रतिशत दूध और दुग्ध उत्पाद संगठित क्षेत्र के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं। असंगठित क्षेत्र में मिलावट की आशंका बहुत अधिक रहती है। यह एनडीडीबी और सरकार के लिए गहरी चिंता का विषय है। इसके लिए अन्य उपायों के साथ-साथ दूध का कारोबार दुग्ध सहकारी समितियों जैसे संगठित क्षेत्र के माध्यम से करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि मदर डेयरी का फिलहाल दूध और दुग्ध के दाम और बढ़ाने का इरादा नहीं है। वर्ष में एक बार मई में दूध के दाम बढ़ाये जाते हैं। ऐसा वर्ष भर में दूध उत्पादन में बढ़ी हुई लागत के कारण किया जाता है और मई में मदर डेयरी के दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध के उत्पन्न कारण ऊर्जा संकट की वजह से परिवहन और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के बावजूद अब दूध के दाम और बढ़ाये जाने का इरादा नहीं है। डॉ शाह ने कहा कि भारत दुनिया के कुल दूध उत्पादन में लगभग एक चौथाई योगदान करता है, जिसके अगले पांच-छह वर्षों में एक तिहाई हो जाने की संभावना है।

