गुना: अपनी लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज 2 जून से गुना जिले के 417 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।कर्मचारियों ने जिला चिकित्सालय के मुख्य गेट के समीप ही अपना धरना पांडाल ठोक दिया है। आंदोलन के पहले ही दिन कर्मचारियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्रकार के शासकीय कार्यों का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया, जिससे जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण अंचल तक की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। आंदोलन के पहले दिन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने विभागों द्वारा थोपी गई जटिल और शोषणकारी ‘अप्रैजल नीति’ (मूल्यांकन व्यवस्था) के विरोध में जमकर नारेबाजी की।
कर्मचारियों का आरोप है कि इस वार्षिक मूल्यांकन के नाम पर उनका मानसिक उत्पीड़न किया जाता है और नौकरी पर हमेशा तलवार लटकी रहती है। इसी के विरोध स्वरूप राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी अप्रेजल संबंधी आदेशों की सांकेतिक प्रतियों को आग के हवाले कर ‘अप्रैजल की होली’ जलाई गई। कर्मचारियों के इस कड़े रुख और पूर्ण कार्य बहिष्कार के कारण आने वाले दिनों में मरीजों की मुश्किलें और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है। जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की गैर मौजूदगी के चलते पहले ही दिन मरीज यहां-वहां भटकते नजर आए। अंचल के औषधि वितरण केंद्र भी बंद मिले, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई।
इन प्रमुख मांगों को लेकर अड़े हैं कर्मचारी
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को कई बार शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही हाथ लगे। इस बार कर्मचारी मुख्य रूप से तीन मांगों को लेकर अड़े हैं। जिनमें सभी संविदा कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नियमित कर स्थायी किया जाए। संविदा बहाली के नाम पर हर साल होने वाले मूल्यांकन और अप्रैजल सिस्टम को तुरंत बंद किया जाए। न्यूनतम वेतन संरचना में तत्काल सुधार किया जाए और पूर्व की तरह इंक्रीमेंट बहाल हो प्रमुख रूप से शामिल है।
6 दिनों का अनोखा प्लान: सुंदरकांड पढ़ेंगे, भैंस के आगे बजाई जाएगी बीन
संविदा कर्मचारियों ने इस बार सरकार को घेरने के लिए बहुत ही रोचक और चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की है। आंदोलन के आगामी दिनों में ये अनूठे चरण देखने को मिलेंगे। आंदोलन के दूसरे दिन जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से जिला अस्पताल, चौराहों और धरना स्थल पर आमजन के लिए ‘प्याऊ’ की स्थापना कर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। तीसरे दिन शासन-प्रशासन की सद्बुद्धि के लिए धरना स्थल पर सामूहिक सुंदरकांड का पाठ और प्रार्थना होगी। चौथे दिन राष्ट्रीय स्तर पर जनसमर्थन जुटाने के लिए एक बड़ा सोशल मीडिया अभियान चलाया जाएगा। पांचवें दिन संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष ज्ञापन सौंपा जाएगा और व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलेगा। छठवें दिन सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतीकात्मक रूप से भैंस के आगे बीन बजाकर प्रदर्शन किया जाएगा।
