इंदौर: सोमवार शाम तेज आंधी और बारिश का दौर शुरू होते ही शहर के कई हिस्सों में अंधेरा छा गया. कहीं घरों की लाइटें बुझ गईं तो कहीं बाजारों की रौनक थम गई. उमस और गर्मी से परेशान लोग बिजली का इंतजार करते रहे, जबकि बिजली कंपनी के मेंटेनेंस और तैयारियों के दावे हवा में उड़ते नजर आए.बिजली कंपनी के अनुसार करीब 40 स्थानों पर 33 केवी लाइनों और पोलों के पास पेड़ तथा बड़ी शाखाएं गिरने से आपूर्ति प्रभावित हुई.
लेकिन सवाल यह है कि यदि मानसून पूर्व मेंटेनेंस और पेड़ों की छंटाई का काम समय पर किया गया था, तो मामूली प्राकृतिक व्यवधान भी शहर की बिजली व्यवस्था को क्यों हिला गया. शहर के कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने से लोग घरों में पसीने से तरबतर रहे. इनवर्टर जवाब देने लगे, पानी की मोटरें बंद हो गईं और छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए. कई क्षेत्रों में बार-बार बिजली आने-जाने का सिलसिला भी चलता रहा, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई.गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से गर्मी के दौरान मेंटेनेंस के नाम पर अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही थी. तब दावा किया गया था कि नेटवर्क को मजबूत बनाया जा रहा है ताकि बारिश और आंधी के मौसम में परेशानी न हो. सोमवार की स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दो हजार शिकायतों का निराकरण
बिजली कंपनी का कहना है कि करीब 800 कर्मचारियों को मैदान में उतारा गया और दो हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण किया गया. अधिकारियों ने कंट्रोल सेंटर से लगातार निगरानी भी की. इसके बावजूद उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि व्यवस्था इतनी चुस्त थी, तो शहर के अनेक हिस्सों में लंबे समय तक अंधेरा क्यों पसरा रहा. आंधी तो कुछ मिनटों की थी, लेकिन उसने बिजली व्यवस्था की तैयारियों और दावों की वास्तविकता जरूर उजागर कर दी. सवाल यह कि हर साल होने वाले मेंटेनेंस पर खर्च और दावों के बावजूद बिजली नेटवर्क आखिर कब तक मौसम के एक झोंके के सामने बेबस नजर आता रहेगा.
बड़े पेड़ों के गिरने से हुआ व्यवधान
बिजली विभाग के अधिकारी अवधेश ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर मेंटेनेंस का कार्य किया जाता है. हालांकि हाल ही में बड़े पेड़ों के गिरने के कारण कुछ व्यवधान उत्पन्न हुए. उन्होंने बताया कि मेंटेनेंस के दौरान लाइन से लगभग 5 फीट नीचे तक पेड़ों की छंटाई की जाती है, ताकि बिजली आपूर्ति सुचारू बनी रहे. इसके बावजूद तेज हवा और पेड़ों के गिरने से लाइनों को नुकसान पहुंचा, जिससे सुधार कार्य में समय लगा. अधिकारी के अनुसार, यदि नियमित मेंटेनेंस समय पर न किया जाए तो बिजली बहाली में और अधिक समय लग सकता है. इस दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है, ताकि मरम्मत कार्य सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके.
