मुंबई 31 जुलाई (वार्ता) महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को सवाल किया कि क्या राज्य सरकार मालेगांव बम विस्फोट मामले में फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी।
श्री सपकाल ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत की ओर से 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी सात आरोपियों को बरी किए जाने के कुछ घंटों बाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय तिलक भवन में संवाददाताओं से बातचीत में यह सवाल उठाया। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म या रंग नहीं होता और आतंकवादी को सज़ा मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा “राज्य सरकार ने मुंबई ट्रेन विस्फोटों के फैसले को लेकर शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। अब सवाल यह है कि क्या वह मालेगांव बम विस्फोट के फैसले में भी ऐसा ही करेगी।” महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के बलिदान को याद करते हु उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारी कीमत चुकायी है और उनका मानना है कि आतंकवादियों का कोई रंग या धर्म नहीं होता।
उन्होंने कहा कि मालेगांव विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, गृह मंत्री आर.आर. पाटिल और मामले के जाँच अधिकारी हेमंत करकरे ने इस मामले की कड़ी जांच की थी। उन्होंने कहा, “हम आज उन्हें याद करते हैं। आज विशेष लोक अभियोजक रोहिणी सालियान का बयान भी प्रासंगिक है, जिन्होंने कहा था कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद एनआईए अधिकारियों ने उनसे मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपियों के प्रति नरम रुख अपनाने को कहा था।”
श्री सपकाल ने आगे कहा, “हालांकि अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है, लेकिन बम विस्फोट किसने किया, यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है। सरकार का रुख आतंकवाद के खिलाफ होना चाहिए। अगर राज्य सरकार मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में शीर्ष न्यायालय जाने को तैयार है, तो उसे मालेगांव मामले में भी ऐसा ही करना चाहिए।”
