
नयी दिल्ली, 01 जून (वार्ता) रेहड़ी पटरी वालों को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज सहायता दे कर उनके कारोबार के अवसरों को बेहतर बनाने की योजना पीएम स्वनिधि ने छह साल पूरे कर लिये हैं और इस दौरान यह योजना लाखों परिवारों को जीवन-यापन के संघर्ष से आत्म निर्भरता की ओर ले जाने वाली शक्ति सिद्ध हुई है और इसकी उपयोगिता तथा उपलब्धियों को देखते हुए सरकार ने इसे मार्च 20230 तक बढ़ा दिया है। विश्लेषणों के अनुसार देश की शहरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रेहड़ी-पटरी वालों को इस योजना के माध्यम से बैंक कर्ज की सुविधा दिलाने वाली इस योजना से ऊंचे ब्याज वाले अनौपचारिक कर्ज पर उनकी निर्भरता दूर हुई है। इस योजना में बिनी किसी गारंटी के कर्ज की सुविधा के अलावा लाभार्थियों को डिजिटल तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। संस्थागत और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाया है। इस योजना का देश भर में तेजी से विस्तार हुआ है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार योजना के छह वर्षों में 75.5 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को 1.12 करोड से ज़्यादा ऋण दिये गये हैं, जिनकी कुल रकम 17,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इस योजना में 55 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया है और इस तरह के लाभार्थी कुल मिला कर लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये के 841 करोड़ से ज़्यादा डिजिटल लेन-देन कर चुके हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार पीएम स्वनिधि के तहत लाभार्थियों को डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और ब्याज सब्सिडी के जरिये लगभग 800 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है। जून 2020 में शुरू की गयी प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ (पीएम स्वनिधि) के तहत रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी के 15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये तक के ऋण, ब्याज सहायता और क्रेडिट गारंटी सहायता के साथ तीन चरणों में दिये जाते हैं। जो वेंडर दूसरे चरण का ऋण सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे 30,000 रुपये तक की सीमा वाले यूपीआई -से जुड़े रुपे क्रे डिट कार्ड की सुविधा के पात्र हो जाते हैं। डिजिटल लेन-देन के तरीके अपनाने और वित्तीय साक्षरता को बढावा देने के लिए, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को खुदरा अथवा थोक बिक्री के लिए 1,600 रुपये तक के कैशबैक का प्रात्साहन भी दिया जाता है।
लाभार्थियों और उनके पररवारों का सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण किया जाता है, ताकि उन्हें सरकार की आठ चुनी हुई केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा सके और उनके लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा जाल बिछाया जा सके। रेहड़ी पटरीवालों को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के सहयोग से वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और खाद्य पदार्थों की शुद्धता और स्वच्छता का प्रशिक्षण दिया जाता है।पीएम स्वनिधि योजना के प्रभावों के 2023 और 2025 में कराये गये स्वतंत्र मूल्यांकन से यह तथा सामने आया है कि इससे लाभार्थियों का आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है और उनकी आमदनी बढ़ी है। लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों को इस योजना के जरिये पहली बार औपचारिक स्रोतों से संस्थागत ऋण प्राप्त हुआ। लगभग 30 प्रतिशत लाभार्थियों को अतिरिक्त कर्ज भी प्राप्त हुआ, जो उनकी वित्तीय क्षमता में सुधार को दर्शाता है। लाभार्थियों की आय में औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की।
