वाशिंगटन, 01 जून (वार्ता) अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उद्देश्य से किए गए प्रस्तावित समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कुछ बदलाव सुझाकर उसे वापस भेजने के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच हमलों और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में हुए इस ताजा सैन्य टकराव के बीच, परदे के पीछे राजनयिक प्रयास भी जारी हैं ताकि एक व्यापक समझौता किया जा सके और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत की रूपरेखा तैयार की जा सके।
यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि उसने ‘ईरान की आक्रामक कार्रवाइयों’ के जवाब में शनिवार और रविवार को ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ‘आत्मरक्षा में हमले’ किए। इस कार्रवाई के तहत दक्षिणी ईरान में रडार प्रणालियों और ड्रोन कमांड-एंड-कंट्रोल केंद्रों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहे एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराए जाने के कथित दावे के बाद की गई। सेंटकॉम ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियों, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो हमलावर ड्रोनों को नष्ट कर दिया, जो क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरने वाले वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों के लिए खतरा बने हुए थे। अमेरिकी सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान के दौरान किसी भी अमेरिकी कर्मी को चोट नहीं आई है।
ईरान की ओर से भी इस पर जवाबी कार्रवाई की गयी।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसने दक्षिणी ईरान पर हुए हमले के जवाब में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक हवाई ठिकाने (एयर बेस) को निशाना बनाया, हालांकि उन्होंने उस स्थान का नाम नहीं बताया। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने एक ऐसे अमेरिकी एयर बेस पर हमला किया है जिसका इस्तेमाल खाड़ी में स्थित सिर्री द्वीप पर एक दूरसंचार केंद्र पर हमले करने के लिए किया गया था। आईआरजीसी ने इस बेस के स्थान की पहचान उजागर नहीं की, लेकिन चेतावनी दी कि अमेरिका की तरफ से किसी भी अगली सैन्य कार्रवाई का इससे कहीं अधिक कड़ा जवाब दिया जाएगा।
यह घोषणा कुवैत द्वारा दिए गए उस बयान के तुरंत बाद आई, जिसमें अमेरिकी बेस की मेजबानी करने वाले कुवैत ने कहा था कि उसकी हवाई रक्षा प्रणालियों ने दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही रोक दिया है। हालांकि, कुवैती अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि ये मिसाइलें और ड्रोन कहाँ से दागे गए थे। यद्यपि अप्रैल की शुरुआत में संघर्षविराम लागू होने के बाद से दोनों पक्षों के बीच कई बार गोलीबारी हुई है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इन चिंताओं को बढ़ा दिया है कि यदि राजनयिक प्रयास धीमे पड़े तो यह युद्धविराम टूट सकता है। अस्थायी संघर्षविराम को एक अधिक स्थायी समझौते में बदलने के उद्देश्य से चल रही बातचीत ने हाल के हफ्तों में गति पकड़ी है। श्री ट्रंप ने बार-बार भरोसा जताया है कि समझौता जल्द ही हो सकता है। सोमवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने आलोचकों से ‘आराम से बैठने’ का आग्रह करते हुए कहा कि ईरान ‘वास्तव में समझौता करना चाहता है’ और इसका परिणाम अंततः अमेरिका के पक्ष में होगा।
खबरों के मुताबिक, समझौते के नवीनतम मसौदे में 60 दिनों के लिए युद्धविराम को बढ़ाने , होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उपाय और ईरान की परमाणु गतिविधियों पर बातचीत को दोबारा शुरू करने का एक ढांचा शामिल है। हालांकि, अभी तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की गई है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक बिना किसी अंतिम निर्णय के समाप्त हो गई थी, जिसमें श्री ट्रंप ने प्रस्ताव में कुछ और बदलाव करने की मांग की थी।अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी संभावित समझौते की एक ऐसी शर्त है, जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। श्री ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “एकमात्र गारंटी जो मुझे चाहिए, वह यह है कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके प्रशासन पर बातचीत को जल्दबाजी में खत्म करने का कोई दबाव नहीं है और वे समझौता करने के लिए ‘किसी जल्दबाजी में नहीं’ हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव होर्मुज जलडमरूमध्य की भविष्य की स्थिति और ईरान के अत्यधिक संवर्धित (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम के भंडार को संभालने से जुड़े हैं।
ईरानी वार्ताकारों ने ऐसी किसी भी व्यवस्था का विरोध करने के संकेत दिए हैं जिससे उन्हें लगता है कि उनके देश के संप्रभु अधिकारों को नुकसान पहुँच सकता है। ईरान के मुख्य वार्ताकार ने रविवार को कहा कि ईरान तब तक किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा जब तक कि उसके राष्ट्रीय हितों और अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा नहीं की जाती।

