स्टॉकहोम में ‘भारत के लोकतंत्र के भीतर’ विषय पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का संबोधन

स्टॉकहोम/नयी दिल्ली, 04 दिसंबर (वार्ता) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुरुवार को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम स्थित स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स (अंतर्राष्ट्रीय मामलों का स्वीडिश संस्थान) में ‘भारत के लोकतंत्र के भीतर’ विषय पर महत्वपूर्ण गोलमेज चर्चा को संबोधित किया।

इस चर्चा में स्वीडन की पूर्व विदेश मंत्री एन लिंडे भी वक्ता के रूप में उपस्थित थीं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, उसके मानक, चुनौतियों और उपलब्धियों को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत करना था।

इस संबोधन से एक दिन पहले ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को वर्ष 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन सहायता संस्थान (अंतरराष्ट्रीय आईडीईए) की सदस्य देशों की परिषद के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया। भारत की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भारत के चुनाव आयोग की वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को दर्शाती है।

ज्ञात रहे कि भारत अंतरराष्ट्रीय आईडीईए का संस्थापक सदस्य है और संगठन की नीतियों, शासन और लोकतांत्रिक पहलों के विकास में लगातार योगदान देता रहा है।

स्टॉकहोम पहुंचने पर भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने आईडीईए के महासचिव डॉ. केविन कैसास-ज़मोरा से भी मुलाकात की और लोकतांत्रिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

अपने संबोधन में ज्ञानेश कुमार ने भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली के व्यापक मानकों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 90 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं, जो दुनिया में किसी भी लोकतंत्र के मुकाबले सबसे बड़ा मतदाता समूह है। उन्होंने 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में छह राष्ट्रीय और 67 राज्य स्तरीय दलों सहित 743 राजनीतिक दलों के 20,000 से अधिक उम्मीदवारों ने भाग लिया। चुनाव संचालन के लिए 10 लाख बूथ स्तर अधिकारियों, 50 लाख मतदान कर्मचारियों सहित 2 करोड़ से अधिक चुनाव कर्मियों ने अपनी भूमिका निभाई।

उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्रता के बाद से भारत ने 18 लोकसभा चुनाव और 400 से अधिक विधानसभा चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं। भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा, बल्कि सबसे विविध और समावेशी लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत अपने आधुनिक लोकतंत्र से जुड़े अनुभवों के साथ-साथ अपनी प्राचीन सभ्यतागत लोकतांत्रिक परंपराओं को भी दुनिया के साथ साझा करना चाहता है।

अपने भविष्य के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारत की अध्यक्षता निर्णायक, महत्वाकांक्षी और कार्रवाई-उन्मुख होगी। भारत ने परिषद की थीम “समावेशी, शांतिपूर्ण, मजबूत और सतत विश्व के लिए लोकतंत्र” निर्धारित की है। अध्यक्षता के दौरान भारत दो मुख्य स्तंभों भविष्य के लिए लोकतंत्र की पुनर्कल्पना और सतत लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र और पेशेवर चुनाव प्रबंधन निकायों को मजबूत करने पर फोकस करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर वोट मायने रखे, हर आवाज सुनी जाए, और दुनिया भर के लोकतंत्र अधिक समावेशी और स्थायी बनें।

भारत के साथ मॉरीशस और मैक्सिको को वर्ष 2026 के लिए आईडीईए परिषद के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

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