विपरीत परिस्थितियों से और अधिक मजबूत बनने की क्षमता विकसित करना जरूरी: ड्रागोन

सिंगापुर, 31 मई (वार्ता) उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सैन्य समिति के अध्यक्ष ज्यूसेप कावो ड्रागोन ने रविवार को सदस्य देशों से केवल रक्षा प्रणाली को लचीला बनाने तक सीमित न रहने और उससे आगे बढ़कर ‘एंटीफ्रैजिलिटी’ (विपरीत परिस्थितियों से और अधिक मजबूत बनने की क्षमता) विकसित करने का आह्वान किया।

एडमिरल ड्रागोन ने सिंगापुर में आयोजित शांग्री-ला संवाद के दौरान ‘विखंडित होती दुनिया में विकसित होती सुरक्षा साझेदारियां’ विषयक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में केवल लचीलापन पर्याप्त नहीं है। संस्थानों, साझेदारियों और समाजों को इस स्तर तक मजबूत बनाया जाना चाहिए कि वे संकटों को केवल झेलें ही नहीं, बल्कि उनसे और अधिक सशक्त होकर उभरें।

उन्होंने कहा, “ हमारा लक्ष्य केवल लचीलापन नहीं, बल्कि एंटीफ्रैजिलिटी है। साझेदारियों और समाजों को इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि वे झटकों को सहने के बजाय उनसे और अधिक शक्तिशाली बनकर निकलें। ”

नाटो के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि यूक्रेन युद्ध, जो अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और जिसमें लाखों लोग हताहत हुए हैं, वैश्विक विखंडन को दर्शाने के साथ-साथ उसे और तेज भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि नाटो इस चुनौती को लेकर पूरी तरह सजग है और आवश्यक कदम उठा रहा है। एडमिरल ड्रागोन ने बताया कि हेग शिखर सम्मेलन में नाटो के सभी 32 सदस्य देशों ने अपनी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत रक्षा व्यय तथा अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे पर खर्च करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, “ यूरोप और कनाडा ने पिछले वर्ष अकेले 574 अरब डॉलर का निवेश किया, जो 20 प्रतिशत की वृद्धि है। हम अरबों डॉलर को सैन्य क्षमता में बदल रहे हैं। ”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वित्तीय प्रतिबद्धताओं को वास्तविक सैन्य क्षमता में बदलना होगा। इसके लिए रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में तेजी और रक्षा उद्योगों के बीच अधिक सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान खतरे इतने तेजी से बदल रहे हैं कि पुराने दौर की धीमी खरीद प्रणाली अब कारगर नहीं रह गयी है।

एडमिरल ड्रागोन ने कहा, “ रक्षा उद्योग को तेजी लानी होगी। अब तेजी से आगे बढ़ने का समय आ गया है।” उन्होंने साझेदारियों को सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता की आधारशिला बताया और कहा कि मानकों, सैन्य सिद्धांतों, आंकड़ों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और औद्योगिक समन्वय के क्षेत्र में सहयोग जरूरी है।

उन्होंने कहा, “ साझेदारियां केवल चर्चा का विषय नहीं हैं। इन्हीं के माध्यम से हम औद्योगिक विखंडन का मुकाबला करते हैं, परस्पर संचालन क्षमता विकसित करते हैं और विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करते हैं। ”

नाटो अधिकारी ने कहा कि यूरो-अटलांटिक और हिंद-प्रशांत क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौतियां अब पहले की तुलना में कहीं अधिक परस्पर जुड़ी और अविभाज्य हो गयी हैं।

उन्होंने सुरक्षा के लिए ‘सम्पूर्ण समाज’ दृष्टिकोण अपनाने का भी आह्वान किया और कहा कि इसमें शिक्षाविदों, उद्योगों, स्थानीय प्रशासन, गैर-सरकारी संगठनों तथा आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा, “ सुरक्षा केवल सरकारों या सेनाओं की जिम्मेदारी नहीं है। हर नागरिक इसका सहभागी है, केवल लाभार्थी नहीं। ”

एडमिरल ड्रागोन ने कहा कि अंकारा में होने वाले आगामी नाटो शिखर सम्मेलन से पहले सैन्य क्षमता विकास और साझेदारी निर्माण दोनों मोर्चों पर समान गति से प्रगति करनी होगी, ताकि गठबंधन बदलती वैश्विक परिस्थितियों में प्रभावी बना रह सके।

 

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