इबोला आउटब्रेक से कांगो में मचा कोहराम, 30 से 50 प्रतिशत मरीजों की हो रही है मौत

इबोला आउटब्रेक ने कांगो में एक नया स्वास्थ्य आपातकाल ला दिया है। इसके बुंडिबुग्यो स्ट्रेन की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है। WHO के अनुसार दुनिया परेशान है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला आउटब्रेक को लेकर दुनिया के लिए एक बड़ी और डराने वाली चेतावनी जारी की है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के मामले बहुत ही ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं। अब तक यहां इबोला के 906 से ज्यादा संदिग्ध मरीज सामने आ चुके हैं जिससे डर का माहौल है। इस खतरनाक बीमारी से संक्रमित होने वाले लोगों की स्थिति बहुत ही ज्यादा गंभीर और चिंताजनक बनी हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह नया स्ट्रेन आम लोगों के लिए बेहद जानलेवा साबित हो रहा है। इसके कारण करीब 30 से 50 प्रतिशत मरीजों की मौत हो रही है जो सच में एक डराने वाला आंकड़ा है। डब्लूएचओ ने इस इबोला आउटब्रेक को पूरी दुनिया के लिए अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अभी तक इस नए स्ट्रेन के इलाज के लिए कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

कांगो में भारी तबाही
कांगो में इबोला संक्रमण के कारण 223 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं जिनकी स्वास्थ्य विभाग तेजी से जांच कर रहा है। अब तक डीआरसी ने इबोला के कुल 125 मामलों की पूरी तरह से आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इनमें इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में हुई 17 मौतें भी विशेष रूप से शामिल हैं।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के साथ ही अब इसके पड़ोसी देश युगांडा में भी इसके नए केस मिले हैं। घनी आबादी वाले इलाकों में फैलने के कारण यह वायरस बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है और पकड़ में नहीं आ रहा है। मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों का सटीक पता लगाकर उन्हें अलग करना प्रशासन के लिए बहुत मुश्किल हो गया है।

मौत का डरावना आंकड़ा
WHO की प्रमुख अधिकारी एनाइस लेगैंड के अनुसार हर 10 में से 5 मरीजों की मौत होने की पूरी आशंका जताई जा रही है। हालांकि ये सिर्फ शुरुआती आंकड़े हैं और इनकी गहराई से आगे और भी ज्यादा जांच होना अभी बहुत बाकी है। अगर समय पर शुरुआती देखभाल और सही इलाज मिल जाए तो इस मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में अस्पतालों में टेस्टिंग क्षमता को और भी ज्यादा बढ़ाया जाएगा।

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि पूरी तरह ठीक होने वाले पहले मरीज को अस्पताल से सुरक्षित छुट्टी मिल गई है। संदिग्ध मामलों के लिए गए नमूनों के पुराने बकाया सैंपल की जांच भी आने वाले कुछ ही दिनों में पूरी कर ली जाएगी। WHO का स्पष्ट कहना है कि संदिग्ध मामलों की संख्या में आगे जाकर और भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह इस बात का एक साफ संकेत है कि स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था अब बिल्कुल ठीक से अपना काम कर रही है। फिलहाल इस खतरनाक संक्रमण के किसी भी तरह के कम्युनिटी ट्रांसमिशन का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है।

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