इन्दौर: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद् की बैठक नालंदा परिसर में आयोजित हुई. बैठक की शुरुआत विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सीजीएचएस दरों पर ओपीडी और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पांच अस्पतालों- जुपिटर, चोइथराम, अरविंदो, गोकुलदास एवं अग्रवाल इंस्टीट्यूट ऑफ आई केयर—के साथ सहमति पत्र के आदान-प्रदान से हुई.
बैठक में वित्त समिति एवं स्टैंडिंग कमेटी की अनुशंसाओं को मंजूरी दी गई. आईईटी परिसर में जैन शोध पीठ भवन निर्माण हेतु पुलिस हाउसिंग बोर्ड के साथ एमओयू करने तथा विश्वविद्यालय में कक्षाओं की कमी दूर करने के लिए क्लासरूम कॉम्पलेक्स (सीआरसी) निर्माण के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई. कार्यपरिषद् ने शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्राइवेट अभ्यर्थी के रूप में लगातार दो पाठ्यक्रम करने के लिए तीन वर्ष के अंतराल की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया. दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले स्वर्ण एवं रजत पदकों की निर्माण लागत बढ़ने के कारण दानदाताओं की जमा राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एवं आईटी के विभागीय पुस्तकालय का नाम पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजकमल नॉलेज सेंटर रखने, विषय विशेषज्ञों के मानदेय में वृद्धि तथा युवक रेडक्रॉस गतिविधियों के नियमित संचालन हेतु शुल्क निर्धारण के प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली.
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए
बैठक में विश्वविद्यालय में हाल में हुई अप्रिय घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई. विश्वविद्यालय की गरिमा, अनुशासन, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. कार्यपरिषद् सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से प्रवेश के समय ‘देवी अहिल्या विद्यार्थी संकल्प पत्र’ भरवाने का प्रस्ताव रखा, जिसमें अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और डिजिटल तकनीक के सदुपयोग के प्रति प्रतिबद्धता शामिल होगी.
