मुख्यमंत्री पद से हटने के बावजूद सिद्दारमैया का दबदबा नहीं होगा कम

बेंगलुरु, 29 मई (वार्ता) कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सिद्दारमैया ने भले ही अपना कार्यालय छोड़ दिया हो, लेकिन उनका दबदबा कम होने के आसार नहीं दिखते। यह एक ऐसी सच्चाई है जो डी.के. शिवकुमार के पक्ष में नेतृत्व परिवर्तन के बाद राज्य में कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायकों, पिछड़ा वर्ग समूहों और जमीनी कार्यकर्ताओं पर श्री सिद्दारमैया की मजबूत पकड़ सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण के बाद भी राज्य कांग्रेस की दिशा तय करती रहेगी।

कांग्रेस आलाकमान सिद्दारमैया के प्रभावशाली ‘अहिंडा’ सामाजिक गठबंधन (जिसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित शामिल हैं) को छेड़ने से बच रहा है। यह गठबंधन कर्नाटक में पार्टी की चुनावी सफलता का मुख्य केंद्र रहा है।

कर्नाटक की राजनीति के ‘अनुभवी सिपहसालार’ के रूप में जाने जाने वाले श्री सिद्दारमैया पद छोड़ने के बावजूद कांग्रेस विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी वफादारी बनाए हुए हैं।

राज्यसभा की भूमिका स्वीकार करने के बजाय कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने का श्री सिद्दारमैया का फैसला साफ संकेत देता है कि वे राज्य के राजनीतिक मामलों में अपना सीधा प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं।

कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब दो शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाने का कठिन काम है — सरकार पर शिवकुमार का नियंत्रण और पार्टी के सामाजिक व संगठनात्मक आधार पर सिद्दारमैया का प्रभाव।

इसके अलावा, कांग्रेस के रणनीतिकारों को डर है कि इस नेतृत्व परिवर्तन से पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों का समर्थन कमजोर हो सकता है, क्योंकि ये वर्ग वर्षों से श्री सिद्दारमैया के साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस राजस्थान या पंजाब जैसे आंतरिक संघर्ष से बचने के प्रति भी पूरी तरह सचेत है, जहां गुटबाजी के कारण अंततः पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि नए शासन के तहत भी कई विधायक सिद्दारमैया के साथ अपनी राजनीतिक निकटता बनाए रख सकते हैं, विशेष रूप से उनकी लंबे समय से चली आ रही जन अपील और चुनावी विश्वसनीयता के कारण।

राजनीतिक टिप्पणीकारों के अनुसार, श्री सिद्दारमैया राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी नेताओं में से एक बने हुए हैं और उम्मीदवारों के चयन, कल्याणकारी राजनीति और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में उनका काफी प्रभाव है।

विश्लेषकों का मानना है कि श्री शिवकुमार की असली परीक्षा पद संभालने के बाद शुरू हो सकती है, जहां उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा और साथ ही श्री सिद्दारमैया के खेमे को कर्नाटक कांग्रेस के भीतर एक समानांतर राजनीतिक व्यवस्था के रूप में विकसित होने से रोकना होगा।

 

 

 

 

 

Next Post

शतक से चूके वैभव सूर्यवंशी, राजस्थान रॉयल्स ने बनाये छह विकेट पर 214 रन

Fri May 29 , 2026
न्यू चंड़ीगढ़ 29 मई (वार्ता) वैभव सूर्यवंशी (96), रवींद्र जडेजा (नाबाद 45) और डॉनोवन फरेरा (नाबाद 38) की शानदार बल्लेबाजी के दम पर राजस्थान रॉयल्स (आरआर) ने शुक्रवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के क्वालीफायर 2 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ छह विकेट पर 214 रनों का विशाल स्कोर […]

You May Like

मनोरंजन