एक्टर पंकज कपूर ने अभिनय को सिर्फ पेशा नहीं बल्कि कला की तरह जिया। करमचंद, ऑफिस ऑफिस, मकबूल और एक डॉक्टर की मौत जैसे किरदारों से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
बॉलीवुड एक्टर पंकज कपूर का जन्म 29 मई 1954 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। पंकज कपूर आज अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं। अपने हर किरदार में जान डाल देने वाले पंकज कपूर आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं। चाहे टीवी का मशहूर जासूस ‘करमचंद’ हो या भ्रष्ट व्यवस्था से जूझता ‘मुसद्दी लाल’, उन्होंने हर किरदार को इतनी गहराई से निभाया कि वह हमेशा के लिए यादगार बन गया।
पंकज कपूर का बचपन से ही झुकाव अभिनय और रंगमंच की ओर था। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद उनका मन थिएटर और अभिनय में ज्यादा लगता था। इसी जुनून ने उन्हें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानी एनएसडी तक पहुंचाया, जहां उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं। एनएसडी से निकलने के बाद उन्होंने लंबे समय तक थिएटर में काम किया।
पंकज कपूर का करियर
पंकज कपूर किसी भी सीन या डायलॉग को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। अगर उन्हें लगता कि किसी संवाद में भाव सही नहीं आ रहा है, तो वह उसे बार-बार दोहराते थे। पंकज कपूर को फिल्मों में पहला बड़ा मौका गांधी से मिला, जिसमें उन्होंने प्यारेलाल नय्यर की भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्होंने जाने भी दो यारो, मंदी और आरोहण जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का दम दिखाया।
फिल्मों में दमदार किरदारों से जीता दिल
पंकज कपूर ने फिल्म एक डॉक्टर की मौत में वैज्ञानिक डॉ. दीपांकर रॉय के किरदार के लिए लंबी रिसर्च की थी। शूटिंग के दौरान वह खुद को बाकी लोगों से थोड़ा अलग रखते थे, ताकि किरदार का अकेलापन और संघर्ष उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। वहीं मकबूल में ‘अब्बा जहांगीर खान’ के किरदार के लिए उन्होंने अपने बोलने, चलने और बैठने के अंदाज तक में बदलाव किया था।
टीवी की दुनिया में भी रहे सुपरहिट
टीवी पर करमचंद, मुंगेरीलाल के हसीन सपने और ऑफिस ऑफिस जैसे शो ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। खासकर ‘ऑफिस ऑफिस’ में मुसद्दी लाल का किरदार आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। पंकज कपूर ने अपने करियर में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। अभिनय के अलावा उन्होंने निर्देशन और लेखन में भी हाथ आजमाया।
