मुरैना: मध्यप्रदेश के मुरैना जिले स्थित राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के देवरी घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में आज 29 घड़ियाल शावकों का जन्म हुआ। इस मौसम में अब तक कुल 99 घड़ियाल शावक हैचिंग के माध्यम से बाहर आ चुके हैं।वन विभाग के सूत्रों के अनुसार पुनर्वास केंद्र में दुर्लभ बटागुर प्रजाति के 18 कछुओं का भी जन्म हुआ है। सुरक्षा और संक्रमण की दृष्टि से सभी शावकों को फिलहाल क्वारंटीन में रखा गया है तथा उनकी विशेष निगरानी की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि जिन 29 अंडों से आज शावक निकले हैं, उन्हें चंबल नदी के बरौली घाट से लाया गया था। इससे पहले 70 अन्य अंडों से भी सफलतापूर्वक शावक निकल चुके हैं। वन विभाग के अनुसार अभी चंबल नदी के बाबूसिंह के घेर घाट क्षेत्र से लाए गए 95 अंडों की हैचिंग होना शेष है। हर वर्ष देवरी घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में चंबल नदी से लगभग 200 अंडे संग्रहित कर सुरक्षित हैचिंग के लिए रखे जाते हैं।
इस वर्ष भी वन विभाग की टीम ने मई माह के प्रारंभ में अंडों को सेंचुरी में सुरक्षित रखा था, जहां अनुकूल तापमान उपलब्ध कराकर उनसे शावक निकाले जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि देवरी सेंचुरी में जन्मे सभी घड़ियाल शावक और कछुए सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बटागुर प्रजाति के कछुए मुख्य रूप से चंबल नदी में ही पाए जाते हैं
