
नयी दिल्ली, 27 मई (वार्ता) पश्चिम एशिया संकट के कारण घरेलू विनिर्माण कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और पौने चार साल में पहली बार अप्रैल में उत्पादों के दाम की तुलना में लागत ज्यादा हो गयी है। बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल की बुधवार को जारी ‘क्विकोनॉमिक्स’ रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी लागत मूल्य का असर थोक महंगाई पर दिख रहा है, लेकिन आने वाले समय में खुदरा महंगाई भी बढ़ती दिखेगी।
उसने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण दुनिया को कच्चे तेल की आपूर्ति में सबसे बड़ा झटका लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लागत की दूसरी वस्तुओं के दाम भी बढ़े हैं। इससे तांबा और अल्यूमीनियम की ऊंची कीमतों से परेशान विनिर्माताओं के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में लागत की मुद्रास्फीति औसतन 6.2 प्रतिशत रही जबकि उत्पादों के औसत दाम 0.7 प्रतिशत बढ़े। ईंधन और खनिज तेलों के अलावा इस्पात, बुनियादी रसायनों, उर्वरकों, प्लास्टिक, कृत्रिम रबड़, मानव निर्मित फाइबर, अलौह धातुओं और अधात्वीय खनिजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गयी।
उसने कहा कि अभी भले ही सिर्फ थोक मुद्रास्फीति बढ़ती हुई दिख रही है, जल्द ही लागत बढ़ने का असर खुदरा महंगाई पर भी दिखेगा। दूसरी तरफ, दवाओं, फर्नीचर, वस्त्रों और वाहनों के साथ डेयरी जैसे खाद्य उत्पादों की मुद्रास्फीति से उत्पादों के दाम बढ़े हैं। क्रिसिल का मानना है कि इस साल लागत मूल्य में तेजी बनी रहने की संभावना है, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुल भी जाये। इसलिए विनिर्माताओं पर ऊंची लागत का दबाव बना रहेगा।
