
उज्जैन। गंगा दशहरा पर्व पर निकली मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा का मंगलवार को भव्य और ऐतिहासिक समापन हुआ। दो दिनों तक चली इस आध्यात्मिक यात्रा में श्रद्धा, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और जल संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सपत्नीक यात्रा में शामिल हुए और रामघाट पर मोक्षदायिनी मां शिप्रा का पूजन-अर्चन कर 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पूरा शिप्रा तट जय श्री महाकाल और जय मां शिप्रा के जयघोष से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री मंगलवार शाम को उज्जैन पहुंचे, जहां हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और भाजपा पदाधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
जल संरक्षण की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जल संरक्षण की व्यापक मुहिम चलाई जा रही है। कुएं, बावड़ी, तालाब, नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए हजारों कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाना सबसे बड़ा दायित्व है।
विधायक बनने से पहले शुरू की थी यात्रा
मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा पिछले 24 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है। खास बात यह है कि डॉ. मोहन यादव ने इस यात्रा की शुरुआत उस समय की थी, जब वे विधायक भी नहीं बने थे। वर्षों पहले शुरू हुई यह धार्मिक यात्रा अब जनआस्था और नदी संरक्षण का विशाल अभियान बन चुकी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ यात्रा में शामिल हो रहे हैं।
25 हजार श्रद्धालुओं ने की दो दिन तक परिक्रमा
इस वर्ष करीब 25 हजार श्रद्धालु दो दिनों तक परिक्रमा यात्रा में शामिल हुए। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने जगह-जगह मंच लगाकर यात्रियों का स्वागत किया। श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी, शरबत, फल और अल्पाहार की व्यवस्था की गई। यात्रा मार्ग पर भक्ति और सेवा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
यात्रा का भव्य समापन
पहले दिन यात्रा रामघाट से शुरू होकर नृसिंह घाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम होते हुए दत्त अखाड़ा पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। दूसरे दिन यात्रा पुनः विभिन्न घाटों और तीर्थ स्थलों से होती हुई रामघाट पहुंची, जहां भव्य समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने मां शिप्रा में दीप प्रवाहित कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
शिप्रा परिक्रमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मोक्षदायिनी मां शिप्रा सनातन संस्कृति में विशेष स्थान रखती हैं। मान्यता है कि शिप्रा नदी के तटों की परिक्रमा और स्नान से आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ महापर्व का आधार भी यही पावन शिप्रा नदी है। शिप्रा तीर्थ परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का माध्यम बन चुकी है।श्रद्धालु इस यात्रा के दौरान विभिन्न प्राचीन मंदिरों, घाटों और तीर्थ स्थलों का दर्शन करते हुए मां शिप्रा के संरक्षण का संकल्प लेते हैं। यही कारण है कि यात्रा में साधु-संतों के साथ युवा, महिलाएं और ग्रामीण श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
पहली बार भारतीय नौसेना बैंड
गंगा दशहरा पर इस बार शिप्रा तट पर एक नया और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा के समापन अवसर पर पहली बार भारतीय नौसेना बैंड ने प्रस्तुति दी। दत्त अखाड़ा घाट पर नौसेना बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत धुनों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। “समुद्र की लहरों सा अनुशासन और सुरों में राष्ट्रभक्ति का जोश” की भावना के साथ प्रस्तुतियों ने घाट क्षेत्र को रोमांच और उत्साह से भर दिया।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नौसेना बैंड की प्रस्तुति का अवलोकन किया और कलाकारों की सराहना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक प्रस्तुति को देखने पहुंचे।
भजन संध्या में बही भक्ति की धारा
यात्रा के समापन अवसर पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। इंदौर के कलाकार श्रेयांश शुक्ला और जबलपुर की लोक गायिका संजो बघेल ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। वहीं बिहार के दरभंगा से आए भजन दल ने भक्तिमय वातावरण निर्मित किया।
प्रसिद्ध भजन गायिका मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भजन संध्या में शामिल होकर भजनों का श्रवण किया। रामघाट पर देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, पुत्र वैभव यादव, संत-महंत, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा नेता, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
ई साइकिल का वितरण
मुख्यमंत्री ने आजीविका मिशन, आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ई-साइकिल वितरित की। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ई-साइकिल से महिलाओं को गांव-गांव पहुंचकर अपने कार्य करने में सुविधा मिलेगी
