​सौसर में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़, खतरे में ग्रामीणों की जान

सौसर। ग्रामीण अंचलों में झोलाछाप और बाहरी डॉक्टरों की बाढ़ आ गई है। सौसर के रामाकोना, लोधीखेड़ा, खैरी तायगांव, पारड़सिंगा, बेरडी मोहगांव, पीपला नारायणवार सहित आसपास के बड़े गांवों में कथित डॉक्टर बिना किसी वैध डिग्री या बिना मध्य प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराए खुलेआम एलोपैथिक इलाज कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के डॉक्टरों की ‘अवैध’ एंट्री, मेडिकल स्टोर से साठगांठ

​क्षेत्र में एक और बड़ा खेल सामने आया है। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नागपुर और सावनेर से बड़े पैमाने पर ऐसे डॉक्टर यहाँ आकर प्रैक्टिस कर रहे हैं, जो मध्य प्रदेश के चिकित्सा विभाग में पंजीकृत ही नहीं हैं। ​ये बाहरी डॉक्टर स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालकों से तगड़ी साठगांठ रखते हैं।

​मरीजों को जानबूझकर बेहद महंगी दवाइयां लिखी जाती हैं, जिससे मेडिकल स्टोर्स की भारी बिक्री होती है।

​बदले में इन डॉक्टरों को मोटा कमीशन मिलता है, जिससे ग्रामीण मरीजों की जेब पर डाका डाला जा रहा है।

पैथोलॉजी लैब्स के साथ 50% ‘कट-मनी’ का खेल

​सूत्रों के अनुसार, इन डॉक्टरों का स्थानीय और बाहरी पैथोलॉजी लैब संचालकों के साथ भी सीधा गठजोड़ है। मरीज को लैब भेजने के बदले में इन डॉक्टरों को 40 से 50 प्रतिशत तक मोटा कमीशन दिया जाता है। इस लालच में मरीजों से जबरन अनावश्यक और महंगी जांचें कराई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि इन लैब संचालकों के तार भी सीधे नागपुर से जुड़े हैं।

हैवी डोज और स्टेरॉयड से खिलवाड़

​ग्रामीण इलाकों में सक्रिय ये फर्जी और बाहरी डॉक्टर सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारियों में भी मरीजों को भारी मुनाफे के चक्कर में हैवी एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड जैसी खतरनाक दवाइयां धड़ल्ले से दे रहे हैं। बिना सही डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का ओवरडोज ग्रामीणों के लीवर और किडनी को फेल कर रहा है।

खुले में फेंक रहे मेडिकल कचरा

​नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन क्लिनिकों के पास बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान का कोई लाइसेंस नहीं है। इलाज के बाद निकलने वाला मेडिकल कचरा जैसे सुई, सिरिंज, ग्लूकोज बोतलें खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे गांवों में संक्रमण और नई बीमारियों के फैलने का खतरा दोगुना हो गया है।

ग्रामीणों में आक्रोश: कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग

​स्थानीय ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन को कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन फर्जी और बिना रजिस्ट्रेशन वाले बाहरी डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में कभी भी कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।

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