ट्रंप की ‘ईरानी नीति’ ने अमेरिका को गतिरोध में धकेला : मोहसिन रज़ाई

तेहरान, 25 मई (वार्ता)  ईरान के वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व सैन्य कमांडर मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों और ईरान के खिलाफ “बिना उकसावे के छेड़े गए युद्ध” के बाद क्षेत्र में हुए हालिया घटनाक्रमों ने अमेरिका को पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में पहुंचा दिया है। तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला में रविवार को अमेरिका-इजरायल युद्ध में मारे गये लोगों की स्मृति में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बल, जो संभवतः अल्पकालिक युद्ध के भ्रम के साथ क्षेत्र में आए थे, अब वह लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की वास्तविकता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने खोर्रमशहर की मुक्ति और इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन की पराजय का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष की वर्षगांठ पिछले 12 महीनों में अमेरिकी और ज़ायोनी दुश्मनों के खिलाफ ईरानी राष्ट्र द्वारा किए गए दो और धार्मिक-राष्ट्रीय रक्षा अभियान प्रतिरोधों के साथ संयोगवश आई है।

श्री रज़ाई ने अमेरिकी और इजरायल के शासन के खिलाफ सड़कों से लेकर युद्धक्षेत्र तक ईरानी जनता और सेना की दृढ़ता की सराहना करते हुए कहा कि विचार, आस्था और प्रेरणा में परिवर्तन के कारण ईरान को अपने दुश्मनों पर विजय मिली है। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ईरान के प्रति अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी का उल्लेख करते हुए श्री रज़ाई ने कहा कि 1980 के दशक में हुए पहले “थोपे गए युद्ध” के दौरान अमेरिका ने गुप्त रूप से हथियार भेजकर सद्दाम हुसैन का समर्थन किया था और उसे यह भरोसा दिलाया था कि अमेरिका, ईरान पर इराकी हमले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई निर्णय नहीं होने देगा। श्री रज़ाई ने कहा कि उस समय अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने ईरान को हथियार और मिसाइलें भेजने से परहेज किया, ताकि उसकी सैन्य क्षमता कमजोर हो सके, जबकि अरब देशों ने सद्दाम को उसके नुकसान की भरपाई के लिए 80 अरब डॉलर से अधिक की सहायता प्रदान की।

उन्होंने कहा कि अवैध युद्ध शुरू करने के बाद अमेरिका पूरी तरह से गतिरोध में फंस गया है। उन्होंने अमेरिका को “समुद्री डाकू” बताते हुए कहा कि उसने ईरान पर हमला किया, लेकिन भागते समय होरमुज जलडमरूमध्य में फंस गया। श्री रज़ाई ने अमेरिका को व्यापक युद्ध में प्रवेश करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि इससे अमेरिका के लिए एक “अंधेरा गलियारा” तैयार होगा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से शुरू होकर फारस की खाड़ी, ओमान सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और हिंद महासागर तक फैलेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में उन्होंने कहा कि यह ईरान के नियंत्रण में है, क्योंकि ईरान ने फारस की खाड़ी में सैन्य गतिविधियों और असुरक्षा को रोका है। उन्होंने कहा कि आईआरजीसी नौसेना जहाजों की पहचान और पंजीकरण कर विभिन्न देशों के वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करती है।

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