प्रतिबंध बेअसर: हिरन नदी का संकट में अस्तित्व

सीधी:शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते नदी से नाला बनी शहर की जीवनदायिनी रही हिरन नदी में अतिक्रमण नही थम रहा। अतिक्रमण को लेकर लगाा गया प्रतिबंध पूरी तरह बेअसर है और हिरन नदी का अस्तित्व संकट में है।बताते चलें कि उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका क्रमांक 18088/2025 पर सुनवाई के पश्चात नोटिस जारी किया गया था। फिर भी हिरन नदी एवं सूखा नदी में अवैध निर्माण का सिलसिला नहीं थम रहा। वहीं तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम गोपदबनास के आदेश पर तहसीलदार गोपदबनास द्वारा हिरन नदी का सीमांकन कराके 3 दर्जन से अधिक अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया।संबंधित अतिक्रमणकारियों को नगर पालिका परिषद सीधी द्वारा 7 दिवस में कार्यवाई हेतु नोटिस भेजी गई थी, कार्यवाई नहीं होने के कारण अतिक्रमणकारी लगातार हिरन नदी को पाट रहे हैं।
जल गंगा संवर्धन अभियान पर कुठाराघात
मध्यप्रदेश शासन का जल गंगा संवर्धन अभियान गर्मी के दिनों में चलाया जा रहा है। विडम्बना यह है कि सीधी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन सीधी शहर के हिरन नदी एवं सूखा नदी के अस्तित्व को बचाने के लिये जल गंगा संवर्धन अभियान चलाने की जरूरत नहीं समझी गई। यह एक तरह से अभियान पर कुठाराघात है।
राजपत्र के नियमन का खुलेआम हो रहा उल्लंघन
म.प्र. राजपत्र दिनांक 31 मार्च 2023 में संवेदनशीलशील क्षेत्रों के नियमन जारी किया गया था। जारी नियमन में कहा गया है कि संवेदनशील क्षेत्र में विकास की गतिविधियां प्रावधानिक है। इनमें गोपालदास बांध के किनारे न्यूनतम 30 मीटर का क्षेत्र खुला रखा जायेगा। सूखे एवं हिरन नाले तथा तालाब के किनारे न्यूनतम 15 मीटर क्षेत्र खुला रखा जायेगा। स्पष्ट है कि खुले क्षेत्र में सभी तरह के निर्माण को प्रतिबंधित किया गया है।
इनका कहना है
दशकों पूर्व हिरन नदी सीधी शहर की जीवनदायिनी नदी रही है। उस समय जलस्रोत के अन्य संसाधन नही होने के कारण डैनिहा, कोटहा, चकदही व सीधी कला के रहवासी इसी नदी के जल का उपयोग करते थे। उस समय हिरन नदी का तट करीब 60-70 फिट चौड़ा था। दिनोंदिन अतिक्रमणकारियों के चलते हिरन नदी सिकुडऩे के कारण नदी से नाला और कुछ जगह नाली के स्वरूप में बदल गई है।

शासन की जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत हिरन नदी को पुनर्जीवित करने मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा नदी के उद्गम स्थल जोरा पहरी में पूजा कर कहा गया था कि हिरन नदी को सीधी शहर से अतिक्रमण मुक्त किया जाए। दुर्भाग्यवश एक वर्ष बाद भी प्रशासन द्वारा हिरन नदी के चिन्हित अतिक्रमण को हटाना तो दूर आज भी बदस्तूर अतिक्रमण किया जा रहा है। भू-माफियाओं द्वारा हिरन नदी के अस्तित्व समाप्त करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते हुए हिरन नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ नये अतिक्रमण पर रोंक लगा अतिक्रमण करने वालों पर तत्काल ठोस कार्यवाही की जाये।
लालचंद गुप्ता, अध्यक्ष जिला व्यापारी संघ सीधी
नवभारत के माध्यम से संज्ञान में लाये गये मामले की गहनता से जांच कर समुचित कार्यवाही हेतु मुख्य नगर पालिका अधिकारी सीधी को निर्देशित किया जायेगा।
राकेश शुक्ला, एसडीएम गोपद बनास सीधी

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