तेहरान, 20 मई (वार्ता) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को चेतावनी दी कि बिना किसी उकसावे के अगर अमेरिका ने उनके खिलाफ फिर से आक्रामक रुख अपनाया तो अमेरिका को देने के लिए उनके पास ‘कई और बड़े झटके’ तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इसमें हफ्तों चले इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी वायुसेना को हुए भारी नुकसान की बात स्वीकार की गयी है। श्री अराघची ने ‘एक्स’ पर किये गये पोस्ट में कहा कि भविष्य में होने वाली किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने के लिए ईरान अमेरिका के साथ पिछले टकरावों से ‘मिले सबक और हासिल किये गये अनुभव’ का इस्तेमाल करेगा और हमलावरों को इन अप्रत्याशित झटकों का मजा चखायेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सांसदों ने इस 40 दिवसीय सैन्य अभियान के दौरान हुए बड़े पैमाने के भौतिक नुकसान को स्वीकार कर एक तरह से ईरान की सैन्य क्षमताओं की पुष्टि कर दी है। श्री अराघची ने अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ने कम से कम 42 विमान खो दिये। इससे होने वाला अनुमानित नुकसान लगभग 2.6 अरब डॉलर (लगभग 21,600 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुका है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान के सशस्त्र बल ‘दुनिया भर में चर्चित एफ-35 विमान को मार गिराने वाले पहले बल’ बन गये हैं।
अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका- इजरायल के संयुक्त रूप से शुरू किये गये 40 दिनों के हवाई बमबारी अभियान के दौरान अमेरिकी सेना के 42 विमान नष्ट हो गये या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए सैन्य साजो-सामान में चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, एक एफ-35ए लाइटनिंग-2, एक ए-10 थंडरबोल्ट-2, हवा में ईंधन भरने वाले सात केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान, एक ई-3 सेंट्री हवाई चेतावनी और नियंत्रण विमान, दो एमसी-130जे कमांडो-2 विमान, एक एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन-2 हेलीकॉप्टर, 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल हैं। अमेरिका-इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किये थे, जो सात अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए एक नाजुक युद्धविराम के बाद से थमे हुए हैं।ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य साजो-सामान पर हमले शुरू किये और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले परिवहन पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। यह एक ऐसा संकरा मार्ग है, जहां से दुनिया की तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ये निष्कर्ष 13 मई को जारी ‘कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस’ की एक रिपोर्ट में सामने आया है। इस रिपोर्ट में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से जुड़े नुकसान को शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट पहला सरकारी समर्थन प्राप्त आकलन है। इसमें इस संघर्ष के दौरान हुए विमानों के नुकसान का पूरा आंकड़ा सामने रखा गया है। यह पेंटागन से मिली जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के मिश्रण पर आधारित है और इसमें उल्लेख किया गया है कि अधिक डेटा उपलब्ध होने पर अंतिम संख्या में बदलाव हो सकता है। अमेरिकी सांसदों ने आगाह किया है कि वास्तविक वित्तीय नुकसान काफी अधिक हो सकता है। उन्होंने इस बात पर गौर किया कि यह अब भी ‘अस्पष्ट’ है कि पेंटागन ने युद्ध में हुए सभी नुकसानों का पूरा हिसाब रखा है या नहीं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गयी है कि नष्ट हुए विमानों को बदलने की दीर्घकालिक लागत 7 अरब डॉलर (लगभग 58,000 करोड़ रुपये) से अधिक हो सकती है, क्योंकि नष्ट हो चुके कुछ सिस्टम अब सक्रिय उत्पादन में नहीं हैं और उनके लिए उत्पादन लाइनों को फिर से शुरू करने की आवश्यकता हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-3 सेंट्री के नुकसान के कारण पेंटागन को पहले रद्द किए जा चुके ई-7 वेजटेल प्रतिस्थापन कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसकी अनुमानित लागत 2.5 अरब डॉलर (लगभग 20,800 करोड़ रुपये) से अधिक है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल मच गयी और अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ने लगीं। इसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। संघर्ष की शुरुआत के बाद से जिनकी लोकप्रियता काफी तेजी से गिरी है। श्री ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्हें ‘बहुत जल्द’ इस संघर्ष को सुलझाने की उम्मीद है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि एक बार समझौता होने के बाद तेल की कीमतें ‘धड़ाम से नीचे’ आ जायेंगी। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संकल्प लिया है कि ईरान अमेरिका के बढ़ते दबाव के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगा।

