नरसिंहपुर: जिला अस्पताल में 108 एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही के कारण एक महिला मरीज की मौत हो गई थी। मृतका के बेटे ने हसन खान ने आज कलेक्टर को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि समय पर एंबुलेंस और ऑक्सीजन न मिलने के कारण उनकी मां की जान गई। परिजनों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। गोटेगांव निवासी हसन खान ने बताया कि उनकी मां छम्मो बी को हृदयाघात के बाद जिला अस्पताल से जबलपुर रेफर किया गया था।
आरोप है कि एंबुलेंस कर्मी वर्दी में नहीं थे और वाहन वार्ड से करीब 200 मीटर दूर खड़ा था। कर्मचारियों के न मिलने पर परिजन स्वयं मरीज को तेज धूप में व्हीलचेयर पर बैठाकर एंबुलेंस तक लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में लिटाने के बाद कर्मचारी ने ऑक्सीजन पर्याप्त न होने की बात कही और जबलपुर जाने से मना कर दिया। अन्य कर्मचारियों ने भी परिजनों को हतोत्साहित किया।
मजबूरी में परिजन मरीज को पीठ पर लादकर अस्पताल गेट तक लाए और ऑटो से निजी अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतका के बेटे ने शिकायत में बताया कि कर्मचारियों के नकारात्मक रवैये के कारण इलाज में देरी हुई। परिजनों के अनुसार, बाद में कर्मचारी अपने बचाव में ऑक्सीजन सिलेंडर भरा होने का दावा करने लगे। हसन खान ने कलेक्टर से मांग की है कि एंबुलेंस के लॉग बुक और कर्मचारियों की मौजूदगी की जांच कर उन्हें दंडित किया जाए।
