ग्वालियर: ग्वालियर निगम परिषद की बैठक में स्मार्ट सिटी द्वारा शहर में कराए गए कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्षदों की मांग और कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए सभापति मनोज तोमर ने बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने निर्देशित किया कि नगर निगम में स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की सेवा लेने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाती है। इसके साथ ही, निगम की जिन संपत्तियों पर स्मार्ट सिटी ने कार्य किया है, उन्हें सर्वसम्मति से वापस निगम के आधिपत्य में लेने का निर्णय लिया गया। स्मार्ट सिटी को 7 दिन के भीतर अपने समस्त कार्यों की जानकारी परिषद को देनी होगी।
परिषद में विद्युत शाखा द्वारा की गई सामग्री खरीदी में भ्रष्टाचार और अनियमितता का मुद्दा जोर-शोर से उठा। इस पर सभापति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक 4 सदस्यीय विशेष जांच समिति गठित कर दी है। समिति के संयोजक पार्षद गिर्राज कंसाना बनाए गए हैं जबकि सदस्य पार्षद बृजेश श्रीवास, मोहित जाट और मनोज राजपूत बनाए गए हैं। यह समिति अगले 15 दिनों में खरीदी प्रक्रिया की जांच कर अपनी रिपोर्ट सदन के सामने प्रस्तुत करेगी।
