
सारनी। सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट मे 660 मेगावाट की नई यूनिट लगने से क्षेत्र का विकास होने से एक बार फिर शहर की रौनक बदल जायेगी.वहीं दूसरी तरफ सतपुड़ा जलाशय पर पर्यटन विभाग के द्वारा 50 लाख की लागत से बने पार्क का एक बार फिर से नवीकरण करने तैयारी चल रही है. बताया जाता है कि पावर प्लांट की चार बड़ी इकाईयों के डिसमेंटल के बाद 660 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट का काम तेजी आ जाएगी. नई यूनिट लगने से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा, मंडल प्रबंधन ने पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष हजारों पौधे का रोपण कर उनकी देखभाल करती है. जिससे शहर के चारो तरफ हरियाली का नजारा देखने को मिलता है. जानकर सूत्रों ने कहा कि नई यूनिट के कार्य मे सतपुड़ा डेम मे बदलाव एवं वन प्राणियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहे है. जिसका कोई औचित्य नहीं है. प्रदेश सरकार एवं पावर जनरेटिंग कंपनी सभी पहलू पर विचार विमर्श करके नई इकाई के निर्माण कार्य को हरी झंडी दी है.नई इकाई के निर्माण कार्य शुरुआती दौर मे है.अभी केवल मजदूरों के लिए आवास बना रहे है नई इकाई का कार्य जनवरी 2027 मे सभी मंजूरी मिलने के बाद शुरू हो सकता है.जानकर लोगो का मानना है कि पावर प्लांट सतपुड़ा के जंगल मे घिरा होने की वजह से चूरना जंगल के वन प्राणीयो का मोमेंट कभी कभार देखने को मिलता है.इस क्षेत्र में हमेशा वनप्राणियों का मोमेंट नहीं रहता है.जानकर सूत्रों का कहना है कि 660 मेगावाट क्षमता वाली नई यूनिट लगने से सतपुड़ा जलाशय एवं
पर्यावरण तथा वन प्राणियों को ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला है.सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट के मुख्य अभियंता एस के लिल्होरे का कहना है कि नई यूनिट के चलते सतपुड़ा डेम मे कोई बदलाव नहीं होगा एवं पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने के हर संभव प्रयास किये जा रहे है.
