
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को भाजपा सरकार पर प्रशासनिक अराजकता, शिक्षकों के साथ अन्याय और प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर असंवेदनशील हो चुकी है।
शिक्षकों की सेवा स्थिति के मुद्दे पर पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। सरकार को यह तक पता नहीं है कि लाखों कर्मचारी किस विभाग के अंतर्गत आते हैं और उनकी पेंशन की जिम्मेदारी किसकी है।
उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा करीब तीन लाख शिक्षकों को कर्मचारी मानने से इनकार किए जाने को “गंभीर और अमानवीय” बताया। पटवारी के अनुसार इस फैसले से शिक्षकों की पुरानी पेंशन, सेवा सुरक्षा और लगभग 20 वर्षों की वरिष्ठता पर संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा, “यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों पर सीधा हमला है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था संभाल रहे शिक्षक आज अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सरकार से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए पटवारी ने सवाल उठाया कि शिक्षकों की सेवा पुस्तिका, पेंशन और वरिष्ठता की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
पटवारी ने प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश रोजगार पोर्टल पर 25 लाख से अधिक युवाओं का पंजीयन इस बात का प्रमाण है कि राज्य में बेरोजगारी भयावह स्तर पर पहुंच चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार देने के बजाय सरकार ने 1.2 लाख से अधिक पद समाप्त कर दिए। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों और युवाओं के लिए बजट नहीं है, तो सरकार कर्ज लेकर प्रचार और आयोजनों पर हजारों करोड़ रुपये कैसे खर्च कर रही है।
पटवारी ने रोजगार मेलों को “सिर्फ प्रचार का माध्यम” बताते हुए समाप्त पदों को बहाल करने, नए पद सृजित करने तथा शिक्षकों के पेंशन और सेवा अधिकार सुरक्षित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षकों, कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ती रहेगी।
