
इंदौर. पीडब्ल्यूडी के आदेश से पूरे प्रदेश के कलेक्टर चिंतित है. चिंता का कारण यह है कि पीडब्ल्यूडी उप सचिव ने आदेश जारी कर सभी रेस्ट हाउस का प्रभार स्थानीय कार्यपालन यंत्री को सौंप दिया. कलेक्टर के पास सिर्फ सर्किट हाउस का प्रभार रह गया, जिसमें सिर्फ चार कमरे हैं.
वर्षों से प्रोटोकाल की चली आ रही व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है. प्रोटोकाल कलेक्टर के अधीन रहता है, जिसमें वीवीआईपी, वीआईपी और अन्य राजनयिकों के ठहरने, खाने और सुरक्षा की जिम्मेदारी रहती है. कोई भी वीवीआईपी किसी भी शहर में जाता है या आने वाला होता है तो कलेक्टर को सूचना दी जाती है. कलेक्टर अपने मातहत को कह कर कक्ष आवंटित और आरक्षित करता है. उक्त व्यवस्था पीडब्ल्यूडी के उप सचिव एआर सिंह ने बदल दी है और सभी जिलों में कार्यपालन यंत्री को रेस्ट हाउस के कमरे आवंटन का अधिकार दे दिया है. इतना ही नहीं पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर कार्यालय प्रमुख को भी राज्य प्रोटोकाल कर अलावा सारे रेस्ट हाउस और कमरे आरक्षित करने का प्रभार सौंपा गया है. बताया जा रहा है कि उक्त आदेश के पीछे कारण यह है कि पूरे प्रदेश में अधिकांश रेस्ट हाउस और वीआईपी के ठहरने के लिए बंगले और रेसिडेंसी कोठी पीडब्ल्यूडी के अधीन है. इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को ठहरने की सुविधा नहीं मिलती थी. इसके बाद उप सचिव ने आदेश जारी किए हैं.
वीवीआईपी व्यवस्थआ करने का संकट गहरा जाएगा
उक्त आदेश एक बाद सभी जिला कलेक्टरों के सामने वीवीआईपी के व्यवस्था करने के लिए संकट गहरा जाएगा. इंदौर कलेक्टर के पास ही सर्किट हाउस के सिर्फ चार कमरे देने का अधिकार रह गया है. इंदौर में स्थिति यह है कि प्रदेश, देश और कई वरिष्ठ अधिकारी इंदौर में आते रहते है. उनकी सुविधाओं और व्यवस्था करना टेढ़ा काम हो गया है.
