यूरोपीय बाजार में भारतीय समुद्री उत्पादन को भेजने की छूट

नयी दिल्ली 14 मई (वार्ता) यूरोपीय संघ(ईयू) की एक अधिसूचना के अंतर्गत की गई घोषणा के अनुसार भारत से झींगा और मछली जैसे मत्स्य पालन उत्पादों को वहां के बाजार में निर्यात की छूट बनी रहेगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि ईयू की ओर से 12 मई को प्रकाशित संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल किया गया है ताकि यूरोपीय संघ के बाजार में जलीय कृषि उत्पादों का निर्यात जारी रखा जा सके। नयी घोषणा से ईयू के 4 अक्टूबर 2024 को जारी कार्यान्वयन विनियमन 2024/2598 में पहले हुई चूक से भारतीय निर्यात को में उत्पन्न चिंता दूर हुई है। ईयू के इससे पहले के विनियमन में भारत को ऐसे अन्य देशों शामिल नहीं किया गया था जिन्हें सितंबर 2026 से मानव उपभोग के लिए पशु मूल के उत्पादों का यूरोपीय संघ में निर्यात करने की अनुमति थी।

संशोधित सूची के प्रारुप के अनुसार भारत निर्यात के लिए मत्स्य पालन उत्पादों के मामले में यूरोपीय आयोग के विनियमन आदेश (ईयू) 2023/905 के अनुरूप उपाय करता है। इसके तहत निर्यात करने वाले देशों को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यूरोपीय संघ को निर्यात किए जाने वाले जीव-जंतु और उन पर आधारित उत्पादों की वृद्धि के लिए रोगाणुरोधी औषधीय उत्पादों और मानव उपचार के लिए आरक्षित रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग से मुक्त हों। यूरोपीय आयोग ने 12 मई 2026 को जारी अपने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि अद्यतन सूची में उन देशों को शामिल किया गया है जिन्होंने खाद्य उत्पादन करने वाले जानवरों में रोगाणुरोधी उपयोग पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का अनुपालन प्रदर्शित किया है और यूरोपीय संघ के नियमों के तहत आवश्यक गारंटी और आश्वासन प्रदान किए हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि भारत को प्रस्तावित सूची में शामिल करना देश के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम है और यह भारत की नियामक प्रणालियों, अवशेष निगरानी तंत्रों और खाद्य सुरक्षा मानकों में यूरोपीय संघ के विश्वास को दर्शाता है। यूरोपीय आयोग द्वारा औपचारिक रूप से अपनाए जाने के बाद, संशोधित विनियमन से सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय मत्स्य उत्पादों का यूरोपीय संघ के बाजार में निर्बाध निर्यात सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
यूरोपीय संघ भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के प्रमुख बाजारों में से एक है। वर्ष 2025-26 के दौरान, यूरोपीय संघ भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा, जिसका कुल निर्यात मूल्य 1.593 अरब डॉलर था और इसमें यूरोपीय संघ का योगदान 18.94 प्रतिशत रहा। 2024-25 की तुलना में यूरोपीय संघ को निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें निर्यात मूल्य में 41.45 प्रतिशत और मात्रा में 38.29 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस क्षेत्र को निर्यात में फार्म में पाली गई झींगा मछली का प्रमुख हिस्सा बना रहा।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि वाणिज्य विभाग द्वारा समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) और निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) जैसे संगठनों के माध्यम से नियामक अनुपालन को मजबूत करने और जिम्मेदार मत्स्य-पालन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए किए गए निरंतर प्रयासों को यूरोप में मान्यता मिली है। मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने पशु चिकित्सा औषधीय उत्पादों, रोगाणुरोधी अवशेषों, पता लगाने की क्षमता और मत्स्य पालन तथा समुद्री भोजन प्रसंस्करण में गुणवत्ता आश्वासन से संबंधित प्रणालियों को लगातार बेहतर बनाया है।

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