प्रो. सोलंकी ने 100 दिनों की ‘भारत जलवायु सत्याग्रह यात्रा’ की शुरुआत की

नयी दिल्ली, 13 मई (वार्ता) मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआई) के पूर्व प्रोफेसर प्रो. चेतन सिंह सोलंकी ने जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ जीवनशैली को लेकर देशव्यापी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत करते हुए बुधवार को यहां स्थित महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट से 100 दिनों की ‘भारत जलवायु सत्याग्रह यात्रा’ की शुरुआत की । ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ नाम से प्रसिद्ध प्रो. सोलंकी आज यहां राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ यात्रा की शुरुआत की। उनकी 51 शहरों से गुजरेगी और करीब 5,800 किलोमीटर दूरी तय करेगी। गांधीवादी विचारों से प्रेरित इस यात्रा का उद्देश्य जलवायु संकट के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और लोगों को जिम्मेदार व टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार, संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल और राजघाट स्थित गांधी समिति के सचिव रजनीश कुमार उपस्थित रहे। एनर्जी स्वराज फाउंडेशन की ओर से आयोजित यह यात्रा आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, कोलकाता, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर समेत कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी और 20 अगस्त 2026 को दिल्ली में समाप्त होगी। इस अभियान का उद्देश्य व्यवहार में बदलाव और सोच-समझकर उपभोग करने की आदत के जरिए लगभग 10 लाख नागरिकों को जलवायु कार्रवाई से जोड़ना है।

इस मौके पर प्रो. सोलंकी ने कहा, “हमारी आय बढ़ सकती है, तकनीक बढ़ सकती है, उद्योग बढ़ सकते हैं, लेकिन पृथ्वी की संसाधन उपलब्ध कराने की क्षमता नहीं बढ़ सकती। आज मानवता 1.8 पृथ्वी के बराबर संसाधनों का उपयोग कर रही है, जबकि हमारे पास केवल एक पृथ्वी है। इसका असर बढ़ते प्रदूषण, गिरते भूजल स्तर और जलवायु आपदाओं के रूप में दिखाई दे रहा है।” उन्होंने लोगों से सत्य और आत्मसंयम पर आधारित जनआंदोलन से जुड़ने की अपील की और एक साल तक नए कपड़े नहीं खरीदने का संकल्प लेने को जलवायु कार्रवाई की दिशा में पहला व्यावहारिक कदम बताया। उन्होंने कहा, “फैशन उद्योग पानी, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग करता है। हमारी जीवनशैली में एक छोटा बदलाव भी क्लाइमेट सत्याग्रह का मजबूत माध्यम बन सकता है।” प्रो. सोलंकी पिछले एक दशक से एनर्जी स्वराज आंदोलन के माध्यम से विकेंद्रीकृत ऊर्जा जागरूकता और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा इसी प्रयास को गांधीवादी सिद्धांतों सत्य, सादगी और आत्मसंयम पर आधारित जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है।

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