नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सोने और चांदी के आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में भारी बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, अब इन कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया गया है। यह नई दरें आज रात 12 बजे से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सोने की मांग को नियंत्रित करना और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत करना है, जो वर्तमान में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण संकट में है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण आयातक देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का लगभग 99 प्रतिशत सोना विदेशों से खरीदता है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच करोड़ों डॉलर के आयात बिल ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा दिया है। सरकार का मानना है कि टैरिफ में 9 प्रतिशत की इस वृद्धि से घरेलू बाजार में मांग कम होगी, जिससे आयात बिल में गिरावट आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम देश की आर्थिक सेहत को सुधारने और रुपये की स्थिति को वैश्विक बाजार में मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से राष्ट्रहित में अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है। आंकड़ों के अनुसार, यदि देश में सोने की खरीद में 30 से 40 प्रतिशत की कमी आती है, तो भारत सालाना करीब 20 से 25 अरब डॉलर की बचत कर सकता है। वहीं, यदि आयात में 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह बचत 36 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जनता के सहयोग से इस भारी-भरकम राशि का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों में किया जा सके।

