वॉशिंगटन/बीजिंग, 12 मई (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग रवाना हो गए हैं, जहां दोनों वैश्विक नेता व्यापार, युद्ध कूटनीति और ताइवान पर गंभीर चर्चा करेंगे। श्री ट्रंप का 2017 के बाद यह पूर्वी एशियाई देश का पहला दौरा है । इस दौरान दशकों में सबसे अहम अमेरिका-चीन सम्मेलन होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू होने वाला दो दिनों का यह सम्मेलन दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच संबंधों को नया आकार दे सकता है। है। श्री ट्रंप 14 मई को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे, जहां दोनों औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और उसके बाद शाम को एक राजकीय दावत का आयोजन किया जाएगा। श्री ट्रंप की 15 मई को वाशिंगटन लौटने से पहले दोपहर के भोजन कार्यक्रम और ‘ऐतिहासिक स्वर्ग का मंदिर’ जाने की भी योजना है।
जब फरवरी में व्हाइट हाउस ने इस दौरे की पुष्टि की तो चीनी सामान पर वाशिंगटन के आसमान छूते शुल्क एजेंडे पर छाए हुए थे। लेकिन 28 फरवरी के बाद दुनिया के राजनीतिक हालात बदल गए जब श्री ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिससे एक युद्ध शुरू हो गया और जिसके कारण ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा और इस स्थिति ने तेहरान को इस रणनीतिक जलमार्ग को नियंत्रित करने के लिए एक बोर्ड बनाने पर मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान एक तनावपूर्ण परमाणु गतिरोध में फंसे हुए हैं क्योंकि वाशिंगटन का तर्क है कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो सकती और तेहरान प्रतिबंधों में राहत, युद्ध खत्म करने, जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकने की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को ‘पूरी तरह से नामंजूर’ कर दिया है क्योंकि दोनों पक्ष किसी भी संभावित समझौते के लिए जरूरी शर्तों से बहुत दूर हैं।
इसलिए दोनों नेताओं को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव पर चर्चा करनी अनिवार्य है। चीन अपना लगभग आधा कच्चा तेल जलमार्ग से आयात करता है। उसने बड़े स्टॉक और अलग-अलग तरह के ऊर्जा मिश्रण से खुद को सुरक्षित रखा है लेकिन इसका आर्थिक असर बहुत बड़ा है। तेल की कीमतों में उछाल ने पेट्रोकेमिकल पर निर्भर निर्माताओं के लिए लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक मंदी की संभावना बनी हुई है क्योंकि चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात पर निर्भर करता है, इसलिए दुनिया जो आर्थिक रूप से इतनी परेशान है कि चीनी सामान नहीं खरीद सकती, उसके लिए अकेले आयात शुल्क युद्ध से भी बड़ा खतरा है।
बैठक में ताइवान का मुद्दा भी मुख्य रहेगा क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिसंबर में ताइपे को 11 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी, जिससे चीन नाराज हो गया था। फिर भी श्री ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह भी सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य है और कहा है कि अमेरिका को उसकी सुरक्षा गारंटी के लिए पैसे देना काफी नहीं है। इस सप्ताह किसी बडे व्यापारिक समझौते की उम्मीदें कम हैं लेकिन अधिक उम्मीद अक्टूबर के संघर्ष विराम को बढ़ाने की है। इसके साथ ही एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा,। दुनिया इस सम्मेलन को बड़ी दिलचस्पी से देख रही है और उम्मीद कर रही है कि यह सम्मेलन सफल हो।

