वाशिंगटन, 11 मई (वार्ता) ईरान युद्ध, चीन के साथ बिगड़ते रिश्ते और दुनिया में एआई पर कब्जे की होड़ के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस हफ्ते चीन जा रहे हैं और यह दौरा उनके लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है।
श्री ट्रंप बुधवार शाम को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन के लिए बीजिंग पहुँचने वाले हैं। अमेरिका में कई लोगों को उम्मीद थी कि यह बैठक तब होगी जब ईरान युद्ध को स्थिर करने की दिशा में कुछ प्रगति हो चुकी होगी, जो वर्तमान में एक अस्थिर युद्धविराम के दौर में है।
इस बीच ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका को एक पन्ने का ज्ञापन सौंपा था, लेकिन श्री ट्रंप ने इसे ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए खारिज कर दिया था। साथ ही उन्होंने ईरान पर ‘खेल खेलने’ का भी आरोप लगाया था। इस स्थिति के कारण बीजिंग शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले व्हाइट हाउस के सामने मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं।
हालांकि, यह शिखर सम्मेलन केवल ईरान वार्ता से कहीं अधिक महत्व रखता है। श्री ट्रंप पर भारी दबाव है कि वह श्री जिनपिंग के सामने या तो नए सिरे से रिश्ते तय करें, तनाव बढ़ाएं या फिर खाली हाथ लौट आएं। श्री ट्रंप के राजनीतिक सहयोगी श्री जिनपिंग के साथ इस सीधी मुलाकात को उनके राष्ट्रपति काल के सबसे निर्णायक राजनयिक क्षणों में से एक मान रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने इस यात्रा को ‘अत्यधिक प्रतीकात्मक महत्व’ वाला बताया है।
राजनयिक औपचारिकताओं के पीछे एक बड़ा सवाल यह है कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियाँ आपसी दुश्मनी को इस तरह संभाल सकती हैं कि वे लंबे समय तक आर्थिक अलगाव या सैन्य टकराव की स्थिति में न पहुँचें। श्री ट्रंप के साथ प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के सीईओ का एक समूह भी बीजिंग जा रहा है, ताकि निवेश सुरक्षित किया जा सके और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में तनाव कम हो सके।
हालांकि, हाल के हफ्तों में ईरान युद्ध के कारण रिश्ते और भी खराब हुए हैं। ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को तीन चीनी सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने युद्ध के दौरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने में ईरानी सेना की मदद की थी। चीन ने भी हालांकि झुकने से इनकार करते हुए ‘ब्लॉकिंग कानून’ लागू कर दिया, जिससे चीनी कंपनियों को ईरानी तेल खरीद से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों को अनदेखा करने का निर्देश मिल गया।
इसी बीच, ताइवान का मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच सबसे खतरनाक और अनसुलझे विवाद के रूप में बना हुआ है। यह द्वीप न केवल सैन्य टकराव का केंद्र है, बल्कि सेमीकंडक्टर उद्योग का भी केंद्र है जो वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था को शक्ति देता है। अमेरिका के दोनों दलों के आलोचकों को डर है कि श्री ट्रंप की व्यक्तिगत कूटनीति और बड़े सौदों की प्राथमिकता ताइवान के लिए अमेरिकी समर्थन को कमजोर कर सकती है।
एआई सुरक्षा के जोखिमों पर भी दोनों नेताओं के बीच पहली बार सीधी चर्चा होने की उम्मीद है। अमेरिकी अधिकारी कह रहे हैं कि व्हाइट हाउस अब एआई सुरक्षा पर चीन के साथ औपचारिक संचार चैनल बनाने पर विचार कर रहा है, ठीक वैसे ही जैसे शीत युद्ध के दौरान परमाणु खतरों को कम करने के लिए ‘हॉटलाइन’ बनाई गई थी। यह चर्चा तब हो रही है जब अमेरिका लगातार चीन पर अमेरिकी एआई कंपनियों से तकनीक और शोध चुराने के आरोप लगा रहा है।
