बिग कैट संरक्षण के लिए कॉर्पोरेट सहयोग जरूरी : भूपेंद्र

नयी दिल्ली 11 मई (वार्ता) केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि बिग कैट के प्राकृतिक वास के पुनर्स्थापन, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और सामुदायिक संरक्षण के लिए कॉर्पोरेट वित्तपोषण बेहद आवश्यक है।

श्री यादव ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के तत्वाधान में आयोजित “वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और समाज का भविष्य तथा विजन फॉर इंडिया-100” सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि भारत एक और दो जून को पहले अंतरराष्ट्रीय बिग कैट शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा है कि बिग कैट के प्राकृतिक वास के पुनर्स्थापन, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और सामुदायिक संरक्षण के लिए कॉर्पोरेट वित्तपोषण बेहद आवश्यक है। उन्होंने उद्योग जगत से बिग कैट संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है, जिसका उद्देश्य दुनिया की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों बाघ, शेर, चीता, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जगुआर और प्यूमा का संरक्षण करना है।

श्री यादव ने कहा कि बिग कैट संरक्षण में उद्योग जगत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्राकृतिक वास पुनर्स्थापन, तकनीक आधारित सर्वेक्षण, सामुदायिक संरक्षण, क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता जैसे क्षेत्रों में कॉर्पोरेट साझेदारी और निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। बिग कैट केवल वन्यजीव नहीं हैं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, ” इन प्रजातियों की रक्षा करके हम जैव विविधता, जल संसाधनों और विशाल वन क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों के कारण दुनिया एक नए युग परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। भारत नवाचार, आर्थिक विकास और संवहनीयता के संतुलन के साथ वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

उन्होंने बताया कि भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। देश की सौर ऊर्जा क्षमता मार्च 2026 तक 150 गीगावाट हो गई है, जबकि 2014 में यह केवल 2.82 गीगावाट थी। उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 50 प्रतिशत स्थापित विद्युत क्षमता अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त हो रही है, जिसे 2030 की समयसीमा से पहले ही हासिल कर लिया गया है।

श्री यादव ने यह भी कहा कि भारत ने 2005 से 2020 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। हाल ही में जारी द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी हासिल करते हुए गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लक्ष्यों को समय से पहले पूरा किया है।

 

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