नयी दिल्ली 11 मई (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण की अपील को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराहट में खरीददारी से बचना चाहिए।
श्री सिंह ने सोमवार को यहां पश्चिम एशिया संकट के बारे में गठित मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संघर्ष की ताज़ा स्थिति की समीक्षा की गई तथा भारत की तैयारी को मजबूत करने और इसका जनता पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद श्री सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सभी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने लोगों से शांत रहने और किसी भी प्रकार की घबराहट से बचने का आग्रह किया, क्योंकि कमी या आपूर्ति शृंखला में व्यवधान रोकने के लिए सभी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्रियों के समूह को बताया गया कि देश में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है और वर्तमान संरक्षण उपाय केवल दीर्घकालिक क्षमता निर्माण के उद्देश्य से किए जा रहे हैं जिससे संकट के लंबा खिंचने की स्थिति से निपटा जा सके। यह भी कहा गया कि आपूर्ति प्रबंधन संतोषजनक है और लोगों को घबराने या ईंधन एवं अन्य वस्तुओं की अत्यधिक खरीद करने की आवश्यकता नहीं है।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि मौजूदा परिस्थिति में भारत की प्राथमिकता ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना, आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों को हर परिस्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति को केवल एक अलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि परस्पर जुड़े वैश्विक वातावरण में किसी भी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय संकट प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सभी देशों को प्रभावित करता है। उन्होंने रणनीतिक संकट पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी आकलन, परिस्थिति योजना और समय पर समग्र सरकारी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री सिंह ने अधिकारियों को प्रधानमंत्री की अपील को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ने जनता से मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने, घरेलू पर्यटन और भारत में ही उत्सव मनाने तथा एक वर्ष तक गैर-आवश्यक सोने की खरीद से बचने की अपील की थी, ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो तथा विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा, “मंत्रालयों और राज्यों को समन्वित तरीके से ईंधन दक्षता, जन-जागरूकता और जिम्मेदार उपभोग व्यवहार को संस्थागत रूप देने के उपाय पहचानने चाहिए।”
श्री सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत को अपने ऊर्जा मिश्रण में परिवर्तन की प्रक्रिया तेज करनी होगी, नवीकरणीय आधारित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का तेजी से विस्तार करना होगा, अधिक विश्वसनीय एवं विविध ऊर्जा स्रोतों की पहचान करनी होगी तथा ऊर्जा दक्षता तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा। उन्होंने भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों से निपटने के लिए रणनीतिक भंडार आवश्यकताओं के पुनर्मूल्यांकन का आह्वान किया।
मंत्रियों के समूह को बताया गया कि देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं है, जबकि अधिकांश अन्य देशों ने घरेलू खपत में भारी कटौती के लिए आपात कदम उठाए हैं। भारत के पास 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का प्राकृतिक गैस भंडार और 45 दिन का एलपीजी भंडार उपलब्ध है। विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर के संतोषजनक स्तर पर है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल परिशोधक और पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है तथा घरेलू मांग की पूरी पूर्ति कर रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगातार अत्यधिक उंचे स्तर पर बनी रहने के कारण देश को भारी लागत वहन करनी पड़ रही है। ईंधन संरक्षण से इस बोझ को कम किया जा सकता है।
समूह को बताया गया कि भारत उन कुछ देशों में शामिल है जहां वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में, संघर्ष शुरू होने के 70 दिनों से अधिक समय बाद भी पेट्रोलियम कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अनेक देशों में कीमतें 30 से 70 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। भारत की तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान वहन कर रही हैं और वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में वसूली घाटा लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, ताकि वैश्विक स्तर पर अत्यधिक बढ़ी कीमतों का बोझ भारतीय नागरिकों पर न पड़े। किसी भी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है और नागरिकों को पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की आवश्यकता नहीं है।
बैठक में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हिस्सा लिया।
