पहाड़गढ़ परियोजना ने तोड़ा दम: 77 गांवों में मचा हाहाकार, बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण

ब्यावरा/सुठालिया। गर्मी के दिनों में पानी की अधिक आवश्यकता हेाती है ऐसे समय में यदि एक नहीं अपितु दर्जनों गांव को पानी उपलब्ध कराने वाली परियोजना के मुख्य स्रोत में पानी खत्म हो जाये और दर्जनों गांवों पर पेयजल संकट गहराने लगे तो इससे बड़ी विडम्बना और क्या होगी. ऐसा ही कुछ इन दिनों सुठालिया क्षेत्र की पहाडग़ढ़ परियोजना के तहत देखने में आ रहा है. इस परियोजना के तहत जिन 77 गांवों में पानी पहुंचता था वहां पानी खत्म होने के कारण सप्ताह भर से पेयजल सप्लाइ पूरी तरह ठप्प हो चुकी है. ग्राम मऊ सहित दर्जनों गांवों में पेयजल संकट काफी गहरा गया है. डेढ़ से तीन किमी दूर तक से पानी लाना पड़ रहा है.

परियोजना के तहत आने वाले गांवों में पेयजल संकट गहरा चला है. कई गांवों में पानी का अत्यधिक संकट बना हुआ है. पेयजल संकट का सामना कर रहे गांवों में बिजली की लुकाछुपी ने इस संकट को और गहरा दिया है. बिजली कटौती एवं घंटो तक कम वोल्टेज के कारण ट्यूबवेल नहीं चलने से पानी की समस्या और गंभीर हो रही है.

मोल पानी खरीदने को मजबूर

इसी परियोजना के तहत आने वाले ग्राम गांगाहोनी में अधिकांश निजी ट्यूबवेलों का जल स्तर कम हो चला है. वहीं बिजली की समस्या भी यहां काफी परेशान कर रही है. लम्बे समय तक कम वोल्टेज होने के कारण ट्यूबवेल नहीं चल पाते है. प्रायवेट टेंकरों से पानी खरीदने को लोग मजबूर है. एक टेंकर पानी 500 रुपये में मिल पा रहा है. विद्युत विभाग के अनुसार बिजली संबंधी कोई समस्या नहीं है, पर्याप्त वोल्टेज आ रहा है.

3 किमी दूर हेण्डपम्प से ला रहे पानी

ग्राम मऊ में पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है. नलजल योजना के बंद होने तथा गांव में स्थित 3 सरकारी एवं अन्य ट्यूबवेल, हेण्डपम्प आदि जल स्त्रोंतो का जल स्तर काफी कम होने के चलते पेयजल संकट काफी गहरा गया है. मऊ निवास श्री घीसालाल व्यास के अनुसार टोड़ी रोड पर स्थित ग्राम निवारा के यहां लगभग 3 किमी दूर एवं हांसरौद रोड पर पठारी क्षेत्र के यहां श्री राधा कृष्ण मंदिर के समीप हेण्डपम्प से वाहनों के द्वारा पानी ला रहे है. गांव में माता मंदिर केयहां स्थित ट्यूबवेल का जल स्तर कम होने से वह रुक-रुककर बमुश्किल चल पाती है. यहां पर भी काफी भीड़ रहती है. निजी टेंकरों से भी पानी लेते है, एक टेंकर पानी करीब 500 रुपये में आता है.

धरातल पर हालात कुछ और

कहने को नलजल योजना के माध्यम से गांव-गांव, घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए परियोजनाएं संचालित की जा रही है किंतु गर्मी के दिनों में जब पानी की अधिक आवश्यकता होती है ऐसे समय पानी के अभाव में परियोजना का दम तोडऩा चिंताजनक है. धरातल पर हालात कुछ और ही बयां कर रहे है. कई गांवों में पेयजल संकट के हालात निर्मित है. पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

परियोजना के तहत इन गांवों में पहुंचता पानी

ब्यावरा विकासखण्ड के तहत जल जीवन मिशन द्वारा सुठालिया क्षेत्र के 77 गांवों में पारसाना स्थित पार्वती नदी से नलजल योजना के तहत गांव-गांव पानी पहुंचाया जाता है. ग्राम गांगाहोनी, चाचाखेड़ी, महाराजखेड़ा, सेमलापार, टोड़ी, गिंदौरहाट,नरी, बिसौनिया, मऊ, मोठबडली, नापानेरा, अमरगढ़ खंडिया, परसाना सहित दर्जर्नो गांवों में पेयजल सप्लाई होती है. जानकारी के अनुसार पार्वती नदी स्थित जहां से पेयजल सप्लाई की जाती है वहां पर पूर्व से बना स्टॉप डेम ही है और उसका भी लीकेज होना बताया जाता है, जिसके कारण वहां पर्याप्त पानी ठहर नहीं पाता है. यहां पर एक उपयुक्त स्टॉप डेम बनना था. ताकि गर्मी के दिनों में भी पर्याप्त पानी का स्टॉक रह सके.

4 मई से बंद हुई पेयजल सप्लाई

परियोजना प्रबंधन के अनुसार जिस जगह पारसाना पार्वती नदी से पेयजल सप्लाई की जाती है वहां पानी खत्म होने के चलते 4 मई से पेयजल सप्लाई को बंद करना पड़ा.

 

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