
सिलवानी। क्षेत्र में गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है और तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच सड़कें मानो धधकती भट्टी में तब्दील हो गई हैं। ऐसे में राहगीरों को राहत देने के लिए बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय अब खुद बदहाली का शिकार हो चुके हैं।
सड़क किनारे वर्षों पहले यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के उद्देश्य से बनाए गए लोहे की चद्दरों वाले प्रतीक्षालय आज जर्जर हालत में हैं। कहीं इन प्रतीक्षालयों के शेड की टीन गायब हो चुकी है, तो कहीं उनका ढांचा तिरछा होकर गिरने की स्थिति में पहुंच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई प्रतीक्षालय इतने कमजोर हो चुके हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
धूप से राहत की जगह बन रहे तपती भट्टी
दोपहर के समय इन लोहे के प्रतीक्षालयों की स्थिति और भी खराब हो जाती है। धूप में तपकर ये यात्रियों को राहत देने के बजाय गर्मी का अहसास और बढ़ा देते हैं। राहगीरों का कहना है कि कई बार इन प्रतीक्षालयों के नीचे खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है।
विकास की दौड़ में खत्म हुई छांव और पानी
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, एक समय ऐसा था जब सड़कों के किनारे लगे घने छायादार पेड़ यात्रियों को प्राकृतिक राहत प्रदान करते थे। राहगीर पेड़ों की छांव में विश्राम करते और पास लगे हैंडपंपों से पानी पीकर प्यास बुझाते थे।
लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण और विकास कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कर दी गई। इसके साथ ही कई हैंडपंप भी निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ गए। नेशनल हाईवे सहित क्षेत्र की अन्य सड़कों पर भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आम लोगों की बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की गई है। सड़कें तो चौड़ी हो गईं, लेकिन राहगीरों के हिस्से की छांव और पेयजल व्यवस्था खत्म हो गई।
अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन गर्मी के इस दौर में जर्जर यात्री प्रतीक्षालयों की मरम्मत, नए शेड निर्माण और पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीरता दिखाएगा, ताकि राहगीरों को राहत मिल सके।
