
छतरपुर। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और हाल ही में झांसी-खजुराहो नेशनल हाईवे पर ट्रक में हुई आगजनी की घटना ने वाहनों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बावजूद, छतरपुर के अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। दिल्ली, भोपाल, इंदौर और सागर जैसे बड़े शहरों के लिए चलने वाली कई निजी बसों की हालत इतनी जर्जर है कि वे कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं।
रस्सियों से बंधे ‘इमरजेंसी गेट’, गायब हैं सुरक्षा उपकरण
बस स्टैंड पर खड़ी बसों का जायजा लेने पर हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि कई बसों की आपातकालीन खिड़कियां (Emergency Exit) टूटी हुई हैं, जिन्हें सुधारने के बजाय रस्सियों से बांधकर रखा गया है। भीषण गर्मी में वाहनों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश बसों में आग बुझाने वाले यंत्र (Fire Extinguishers) तक मौजूद नहीं हैं।
खत्म हो चुकी फिटनेस, फिर भी धड़ल्ले से संचालन
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि बस स्टैंड से संचालित होने वाली कई बसों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार, बिना वैध फिटनेस और परमिट के बसों का संचालन प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर यात्रियों की जान जोखिम में डाली जा रही है। इसके अलावा, बसों के अंदर किराया सूची न होना भी आम बात हो गई है, जिससे यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
परिवहन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
क्षेत्रीय लोगों ने परिवहन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन इन जर्जर बसों के खिलाफ कोई विशेष जांच अभियान चलाएगा, या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी?
