नयी दिल्ली, 08 मई (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में क्राउन मिनरल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (सीएमटीसी ) और उसके साझेदारों से जुड़े एक बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में छह जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
यह जानकारी ईडी के गोवा में पणजी स्थित कार्यालय ने शुक्रवार को दी।
ईडी के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान, 67.50 लाख रुपये की नकदी, संपत्ति की बिक्री के दस्तावेजों सहित आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए गए। ईडी ने सीएमटीसी के साझेदारों और अन्य लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए ) के तहत कार्रवाई शुरू की।
यह प्राथमिकी केनरा बैंक द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सीएमटीसी के साझेदारों (जो कथित तौर पर कच्चे लौह अयस्क के व्यापार में लगी एक फर्म है) ने धोखाधड़ी करके केनरा बैंक की मडगांव शाखा से 7.00 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा प्राप्त की थी। ऋण चुकाने में चूक के कारण, ऋण खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया, जिस पर 6.19 करोड़ रुपये बकाया थे।
ईडी की जाँच में पता चला कि सीएमटीसी का असल में कोई कारोबार नहीं था और केनरा बैंक से लिया गया ऋण उसके साझेदारों के निजी बैंक खातों में डाल दिए गए थे। कैश क्रेडिट लिमिट को रिन्यू और जारी रखने के लिए केनरा बैंक में हर साल के स्टॉक के जाली बयान जमा किए गए थे।
जाँच में यह भी पता चला कि केनरा बैंक के पास गिरवी रखी गई उन्हीं सम्पत्तियों को एक ही समय पर कई दूसरे बैंकों (जिनमें ममडगांव अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, कर्नाटक बैंक और बैंक ऑफ बडोदा शामिल हैं) के पास भी गिरवी रखा गया था, ताकि धोखाधड़ी करके 10.02 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लोन लिए जा सकें।
आरोपियों ने एक आपराधिक साज़िश के तहत उन्हीं सम्पत्तियों के लिए कई बिक्री विलेख तैयार किए और क्रेडिट सुविधाएँ पाने के लिए इन विलेखों की अलग-अलग प्रतियाँ अलग-अलग बैंकों को सौंपी; इस तरह उन्होंने अपराध से हासिल की गई रकम को छिपाया, उसका रूप बदला और उसे बेदाग़ साबित करने की कोशिश की।
इससे पहले ईडी ने पीएमएलए के तहत सीएमटीसी के साझेदारों से जुड़ी 2.86 करोड़ रुपये की सम्पत्तियों को अस्थायी तौर पर ज़ब्त कर लिया था। इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है।
