ऑपरेशन सिंदूर से लाभ मिला है, लेकिन युद्ध केवल दुख लाते हैंः फारूक

श्रीनगर, 06 मई (वार्ता) ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि इस ऑपरेशन का लाभ मिला है, लेकिन युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं और वे केवल दुख लाते हैं।

श्री अब्दुल्ला ने श्रीनगर में पत्रकारों से कहा, “ऑपरेशन सिंदूर’ ने अपना लाभ दिया है। मुझे लगता है कि अब युद्ध का कोई सवाल ही नहीं उठता। युद्ध समाधान नहीं लाते, वे केवल कष्ट लाते हैं।”

वैश्विक संघर्षों का उदाहरण देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चीमी एशिया में अस्थिरता के कारण हुई तबाही की ओर इशारा किया। उन्होंने यूक्रेन और मध्य पूर्व के हालातों का जिक्र करते हुए लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों की मानवीय और आर्थिक लागत को भी रेखांकित किया।

श्री अब्दुल्ला ने व्यापक आर्थिक परिणामों, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधानों पर भी प्रकाश डाला। ईरान युद्ध से जुड़ी गैस उत्पादन चुनौतियों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि कतर जैसे देशों को उत्पादन स्तर को पूरी तरह से बहाल करने में ‘एक या दो साल’ लग सकते हैं।

पश्चिमी एशिया की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक स्थितियों के कारण पूर्ण पैमाने पर युद्ध की संभावना कम है। उन्होंने कहा, “चिंता न करें, दुनिया युद्ध के लिए तैयार नहीं है। हर देश की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है और कोई भी देश युद्ध नहीं चाहता।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पश्चिमी एशिया में दबाव जारी रहा, तो दुनिया की स्थिति इतनी खराब हो जाएगी कि जीवित रहना मुश्किल होगा।

बंगाल चुनाव के नतीजों पर श्री अब्दुल्ला ने कहा कि ममता बनर्जी परिणामों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “वह (ममता) कहती हैं कि वहां बहुत धांधली हुई है। बंगाल में यही स्थिति है। तमिलनाडु को नई सरकार मिल रही है, केरल में कांग्रेस जीती है और असम में भाजपा की जीत हुई है।”

हाल के विधानसभा चुनावों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर श्री अब्दुल्ला ने कहा कि हर चीज का प्रभाव पड़ता है। वहीं, पंजाब में हुए धमाकों पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत में ऐसी चीजें होती रही हैं और इसमें कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराना नहीं चाहिए।

 

 

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