जेनेवा, 06 मई (वार्ता) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा है कि तपेदिक (टीबी) के नये टीकों का नैदानिक परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) प्रगति पर है और अगले दो वर्षों में इनके प्रभाव के परिणाम सामने आ जायेंगे जिससे पता चलेगा कि ये टीके कितने कारगर हैं।
इथियोपिया के पूर्व स्वास्थ्य और विदेश मंत्री रहे श्री टेड्रोस के मुताबिक हम मेडिकल साइंस में कामयाबी की एक नयी इबारत लिखने के बेहद करीब हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2026 में भी वैश्विक स्तर पर तपेदिक सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बना हुआ है। इसकी स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। डब्ल्यूएचओ की नवीनतम ‘ग्लोबल टीबी रिपोर्ट’ के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लगभग 1.08 करोड़ लोग टीबी से बीमार हुए और इस बीमारी से दुनिया भर में करीब 12.5 लाख लोगों की जान चली गयी। इसका अर्थ है कि टीबी हर साल लगभग किसी भी अन्य एकल संक्रामक एजेंट की तुलना में अधिक मौतों का कारण बन रही है और यह फिर से सबसे घातक संक्रामक बीमारी के रूप में उभर आयी है।
भारत में तपेदिक के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। दुनिया के एक चौथाई से भी ज्यादा तपेदिक मरीज (27 फीसदी) यहां है। इसके बावजूद देश ने वैश्विक तपेदिक उन्मूलन अभियान (2030) से पांच साल पहले 2025 में यहां से तपेदिक उन्मूलन का लक्ष्य रखा था, जिसमें वह चूक गया । केंद्र सरकार ने इस निराशा से निकलने के लिए ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ को और तेज कर दिया है। वर्ष 2025-26 में भारत में अनुमानित 28.2 लाख टीबी के मामले दर्ज किये गये हैं। वर्तमान में भारत में टीबी से होने वाली मौतों का आंकड़ा सालाना लगभग 3 लाख 42 हजार से भी ज्यादा है। इस भयावहता के मद्देनजर श्री टेड्रोस ने नये टीकों की खोज के करीब पहुंचने की जो जानकारी दी है, वह देश और दुनिया के स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बड़ी राहत बन सकती है।

