
छतरपुर। भीषण गर्मी के बीच बकस्वाहा जनपद के ग्राम बीरगढ़ और कुही में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ विकास के दावों की ‘पाइपलाइन’ पिछले चार महीनों से टूटी पड़ी है। आलम यह है कि गाँव की मासूम बेटियों को स्कूल का बस्ता छोड़कर सिर पर मटके उठाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों की प्यास औरf प्रशासन की सुस्ती के बीच अब लोगों का सब्र जवाब देने लगा है।
विकास का ढांचा खड़ा, पर कंठ सूखे
विडंबना देखिए कि दोनों गाँवों में पानी की टंकी बनी है और घर-घर नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन भी बिछी है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पाइप टूटने के कारण महीनों से नलों में एक बूंद पानी नहीं टपका। पीने के पानी के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को तपती धूप में एक किलोमीटर दूर भटकना पड़ रहा है।
10 साल की नम्रता का दर्द: पढ़ाई या पानी?
गाँव की 10 वर्षीय छात्रा नम्रता प्रजापति ने जिला कलेक्टर से भावुक अपील की है। उसने बताया कि पानी के इंतजाम में इतना समय बीत जाता है कि वह स्कूल नहीं जा पाती। वहीं ग्रामीण जितेंद्र नामदेव ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि “एक तरफ नलों में पानी नहीं आ रहा, दूसरी तरफ विभाग हर महीने बिल भेजने में कोई कोताही नहीं बरत रहा।” इस दोहरी मार से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
एक्शन में प्रशासन: ठेकेदार को नोटिस जारी
मामला गर्म होने के बाद तहसीलदार भरत पांडे ने संज्ञान लिया है। उन्होंने जल निगम के ब्लॉक प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए ठेकेदार को तत्काल पाइपलाइन सुधारने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में जल आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो संबंधितों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
