नई दिल्ली/कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से हिंसा और तोड़फोड़ की खबरें सामने आ रही हैं। चुनाव आयोग (ECI) ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों को बिना देरी किए गिरफ्तार किया जाए। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
राज्य के बीरभूम, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जैसे क्षेत्रों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यालयों में तोड़फोड़ और कार्यकर्ताओं पर हमलों की खबरें आई हैं। टीएमसी ने बीजेपी पर ‘खूनी खेल’ खेलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ता के नशे में बीजेपी कार्यकर्ता हिंसा फैला रहे हैं और बुजुर्ग महिलाओं तक को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएपीएफ की 500 कंपनियां पहले से तैनात हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग ने स्थिति पर करीब से नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया है। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना देने के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1800-345-0008 जारी किया गया है। आयोग ने जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी व्यक्तिगत निगरानी में फ्लैग मार्च आयोजित करें। हिंसा की कथित घटनाओं में अब तक दो लोगों की मौत की सूचना मिली है, जिसके बाद सुरक्षा बलों को ‘हाथ पर हाथ धरे बैठने’ के बजाय सक्रिय कार्रवाई करने को कहा गया है। प्रशासन का प्रयास है कि चुनाव के बाद के इस दौर को पूरी तरह हिंसा मुक्त रखा जाए।

