वियना/दुबई | ग्लोबल ऑयल मार्केट में मची उथल-पुथल के बीच ओपेक प्लस (OPEC+) समूह ने रविवार को एक ऐतिहासिक बैठक में कच्चे तेल के उत्पादन कोटा में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। संगठन के सदस्यों ने तय किया है कि जून महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल (bpd) अतिरिक्त तेल का उत्पादन किया जाएगा। यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के संगठन से बाहर होने के ठीक बाद आया है। सऊदी अरब, रूस और कुवैत सहित सात प्रमुख देशों ने बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली है, ताकि यूएई के जाने से पैदा हुए खालीपन को भरा जा सके और कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
तेल उत्पादन बढ़ाने का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में युद्ध का तनाव चरम पर है। फरवरी 2026 में ईरान पर हुए हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी जारी है, जिससे वैश्विक तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि ओपेक प्लस का यह कदम न केवल आपूर्ति बढ़ाएगा, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देगा कि संगठन आज भी तेल बाजार पर अपना दबदबा बनाए हुए है। रिस्टैड एनर्जी के विशेषज्ञों के अनुसार, यह समूह यह साबित करना चाहता है कि भू-राजनीतिक तनाव और आंतरिक कलह के बावजूद वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की शक्ति रखता है।
भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करते हैं, ओपेक प्लस का यह फैसला बड़ी राहत लेकर आ सकता है। कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के दामों में स्थिरता मिल सकती है। यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होता है और आपूर्ति सुचारू रहती है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक शुभ संकेत होगा। बाजार में बढ़ी हुई लिक्विडिटी से निवेशकों का भरोसा भी लौटेगा और घरेलू ईंधन बाजार में कीमतों के बेकाबू होने का खतरा टल जाएगा।

