चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने पूरे देश को चौंका दिया है, जहाँ ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को उनके अपने गढ़ कोलाथुर सीट से हरा दिया है। कोलाथुर सीट, जिसे 2011 से स्टालिन का सुरक्षित किला माना जाता था, वहाँ बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वी.एस. बाबू को कुल 82,997 वोट मिले, जबकि मुख्यमंत्री स्टालिन को 74,202 वोटों से संतोष करना पड़ा। राज्य के राजनीतिक इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
75 वर्षीय वी.एस. बाबू राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं और कभी डीएमके के कद्दावर नेता रह चुके हैं। उन्होंने उत्तर चेन्नई जिला सचिव के रूप में वर्षों तक पार्टी संगठन को मजबूत किया और 2006 में पुरासावलकम क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। दिलचस्प बात यह है कि 2011 में जब स्टालिन पहली बार कोलाथुर से लड़े, तब बाबू ही उनके चुनाव प्रभारी थे। बाद में पार्टी के भीतर समीकरण बिगड़ने और सेकर बाबू की बढ़ती नजदीकियों के कारण उन्होंने डीएमके छोड़ दी थी। एआईएडीएमके से होते हुए वे फरवरी 2026 में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हुए, जिन्होंने उन्हें उनकी पुरानी कर्मभूमि कोलाथुर से चुनावी मैदान में उतारा।
वी.एस. बाबू की यह जीत केवल एक सीट की हार नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। स्टालिन को हराने वाले बाबू ने अपने हलफनामे में 3.7 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। जानकारों का मानना है कि क्षेत्र की गहरी समझ और जमीनी पकड़ ने उन्हें मुख्यमंत्री जैसे दिग्गज चेहरे के खिलाफ जीत दिलाने में मदद की। इस परिणाम के बाद डीएमके खेमे में निराशा है, वहीं टीवीके कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। 1996 में जयललिता की हार के बाद, स्टालिन की यह शिकस्त राज्य की सबसे बड़ी चुनावी सुर्खियों में शुमार हो गई है।

