
छतरपुर। रविवार की शाम छतरपुर जिले के लिए आफत बनकर बरसी। अचानक बदले मौसम के मिजाज ने न केवल तपती गर्मी से राहत दी, बल्कि अपने पीछे तबाही के गहरे जख्म भी छोड़ दिए। तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने एक तरफ जहां अन्नदाता की मेहनत को पानी-पानी कर दिया, वहीं वैवाहिक कार्यक्रमों की खुशियों में भी खलल डाल दिया।
खरीद केंद्रों पर बदइंतजामी की चढ़ी बलि: भीगा हजारों क्विंटल ‘सोना’
मौसम की सबसे दर्दनाक मार जिले के किसानों पर पड़ी है। खलिहानों में कटी रखी फसल और सरकारी खरीद केंद्रों पर तुलाई का इंतजार कर रहा गेहूं मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ गया। विडंबना यह रही कि खरीद केंद्रों पर प्रशासन के ‘तिरपाल और सुरक्षा’ के दावे हवा-हवाई साबित हुए। खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल गेहूं भीगने से किसान अब खून के आंसू रोने को मजबूर हैं।
किसानों का आक्रोश: किसानों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद परिवहन में देरी और भंडारण की पुख्ता व्यवस्था न होने से आज उनका ‘पीला सोना’ काला पड़ने की कगार पर है।
टेंट उखड़े, बत्तियां गुल: शादी के रंग में पड़ा भंग
आंधी-तूफान का तांडव इतना भीषण था कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक चल रहे मांगलिक आयोजनों में चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते सजे-धजाए पंडाल ताश के पत्तों की तरह ढह गए।
बिखरी खुशियां: धूल भरी आंधी के कारण भोजन के पंडालों में मिट्टी भर गई और बिजली के खंभे गिरने से पूरे जिले के बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया। जनरेटरों के भरोसे चल रहे कार्यक्रमों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कहीं सजावट का सामान हवा में उड़ता दिखा, तो कहीं मेहमान जान बचाकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते नजर आए।
शहर से गांव तक जनजीवन अस्त-व्यस्त
तेज हवाओं ने कई जगहों पर विशालकाय पेड़ों और होर्डिंग्स को धराशायी कर दिया, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ। देर रात तक बिजली विभाग की टीमें ठप पड़ी सप्लाई को बहाल करने की जुगत में लगी रहीं।
