मुंबई, 04 मई (वार्ता) पश्चिम एशिया संकट के बीच अप्रैल में देश में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी देखी गयी, हालांकि परिचालन परिस्थितियों में चार साल की दूसरी सबसे बड़ी सुस्ती देखी गयी।
एचएसबीसी द्वारा भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए सोमवार को जारी खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मार्च के 53.9 से बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना वृद्धि को और इससे कम रहना गतिविधियों में गिरावट को दिखाता है। वहीं, 50 का स्तर स्थिरता को दिखाता है।
पीएमआई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत में एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि पीएमआई में बढ़ोतरी के बावजूद परिचालन परिस्थितियों में चार साल की सबसे सुस्त वृद्धि देखी गयी।
उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव अब ज्यादा स्पष्ट दिखने लगा है, विशेष कर मुद्रास्फीति में। लागत में अगस्त 2022 के बात की सबसे तेज वृद्धि देखी गयी है। वहीं, उत्पादों की कीमत पिछले छह महीने में सबसे तेजी से बढ़ी है। इन सबसे बावजूद उत्पादन, नये ऑर्डर (निर्यात समेत) और रोजगार में वृद्धि देखी गयी। रिपोर्ट में कहा गया है कि नये ऑर्डर और उत्पादन बढ़े हैं, लेकिन इनकी रफ्तार कम से कम साढ़े तीन साल में सबसे कम रही है। सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले कंपनी प्रबंधकों ने बताया कि विज्ञापन और मांग में मजबूती से बिक्री और उत्पादन बढ़ा है, लेकिन चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों के कारण वृद्धि प्रभावित हुई है।
विदेशों से नये ऑर्डरों में सात महीने की सबसे बड़ी तेजी देखी गयी है। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, केन्या, चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन से कंपनियों को ज्यादा ऑर्डर मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया संकट के बीच अल्यूमीनियम, रसायन, बिजली के कम्पोनेंट, ईंधन, चमड़ा, पेट्रोलियम उत्पाद और रबड़ की कीमतें बढ़ने से कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ा है। कुल मिलाकर मुद्रास्फीति की दर अगस्त 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर रही। इस कारण विनिर्माताओं ने अपने उत्पादों के दाम में छह महीने की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है। उपभोक्ता उत्पाद एक मात्र ऐसे उपवर्ग रहा जिसमें कीमतों में कमी देखने को मिली।

