
छतरपुर। शहर के कूड़नताल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन भक्ति की अविरल धारा बही। आदिवासी समुदाय और क्षेत्रवासियों के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही भगवान की मनमोहक झांकी सजाई गई, पूरा परिसर ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कथा व्यास ने किया कृष्ण जन्म का जीवंत वर्णन
कथा व्यास पंडित देवेंद्र मिश्रा ने श्रीकृष्ण जन्म के आध्यात्मिक और दार्शनिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर भक्तों का कल्याण करते हैं। उन्होंने कंस के अत्याचारों और वासुदेव-देवकी के संघर्ष के बीच कान्हा के अवतरण का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
भजन-कीर्तन पर थिरके श्रद्धालु
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान विशेष भजनों की प्रस्तुति दी गई। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और झूमकर नृत्य करने लगे। पूरे मंदिर परिसर में एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष सजावट की गई और प्रसाद वितरण किया गया।
धर्म और संस्कार का संगम
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार और आपसी भाईचारे का संदेश पहुंचाना है। आदिवासी समाज द्वारा इस बड़े आयोजन का नेतृत्व करना सामाजिक समरसता की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। आयोजनकर्ताओं ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि आगामी दिनों में होने वाली कथा और पूर्णाहुति में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करें।
