नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती के लिए कर्मचारियों के चयन पर सवाल उठाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग (ECI) को मतगणना के लिए अपनी पसंद के अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है। अदालत ने कहा कि आयोग के 13 अप्रैल के सर्कुलर को गलत नहीं ठहराया जा सकता। टीएमसी ने आरोप लगाया था कि आयोग केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों को ही सुपरवाइजर बना रहा है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने टीएमसी की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह साफ कर दिया है कि मतगणना में केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों का मिश्रण (Mix) होगा, ऐसे में किसी भी प्रकार की धांधली का डर निराधार है। आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास किसी भी सरकारी पूल से स्टाफ तैनात करने का अधिकार होता है। इस स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले में अब किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है।
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान संपन्न हो चुका है और अब सबकी नजरें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले ही 30 अप्रैल को टीएमसी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि पीएसयू और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने में कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब साफ हो गया है कि चुनाव आयोग अपने तय नियमों के अनुसार ही मतगणना प्रक्रिया पूरी कराएगा। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी, लेकिन अंततः उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

