नशा कारोबारी और निजी एंबुलेंस की चिकित्सालय में फिर घुसपैठ 

सतना :जिला चिकित्सालय परिसर में निजी एंबुलेंस दलालों की धमाचौकड़ी कोई नई बात नहीं है. मरीज के परिजनों को बरगलाकर निजी हास्पिटल ले जाना और बदले में कमीशन लेने का खेल शहर से लेकर जबलुपर तक जारी रहता है. हलांकि प्रशासन की सक्रियता के चलते कोतवाली पुलिस ने कुछ कड़ाई बरती, जिससे कुछ समय के लिए लगाम लगी रही. लेकिन अब एक बार फिर से निजी एंबुलेंस दलालों के साथ-साथ नशे के कारोबारियों का चिकित्सालय में जमघट लगना शुरु हो गया है.

यह जानकारी किसी से भी छिपी नहीं है कि जिला चिकित्सालय परिसर में दो दर्जन से अधिक निजी एंबुलेंस दलाल सक्रिय रहते हैं. अस्पताल में पूर्व से भर्ती अथवा उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीज के परिजनों को बरगलाकर झांसे में लेते हुए शहर अथवा जबलपुर के कुछ निजी हास्पिटल में ले जाया जाता है. जिसके बदले में उन्हें मोटा कमीशन प्राप्त होता है. इतना ही नहीं बल्कि दवाएं दिलाने और जांच कराने से लेकर रक्त की उपलब्धतता सुनिश्चत कराने के एवज में भी इनके द्वारा मोटी रकम मरीज के परिजनों से वसूली जाती है. मोटे कमीशन के इस खेल में प्रतिद्वंदिता होने के कारण आपसी विवाद होना भी स्वाभाविक है.

जिसे आए दिन अस्पताल परिसर अथवा मुख्य गेट के सामने कानून-व्यवस्था के उड़ते माखौल के जरिए भी आसानी से समझा जा सकता है. इन दलालों के हौसले इस कदर बुलंद रहते हैं कि अपने कमीशन के खेल में आड़े आने पर ये चिकित्सालय के सुरक्षा गार्ड से लेकर पैरामेडिकल-नर्सिंग स्टॉफ को भी सरेआम धमकाने से नहीं चूकते. हलांकि कुछ समय पहले सुरक्षा गार्ड को धमकाने और हमला करने से सुर्खियों में आने के कारण प्रशासन द्वारा कड़े निर्देश दिए गए थे.

जिसकी वजह से एक ओर जहां अस्पतान प्रशासन और वहीं दूसरी ओर कोतवाली पुलिस द्वारा इन दलालों पर लगाम लगानी शुरु कर दी थी. लेकिन मामला ठंडा होते ही एक ओर जहां अस्पताल प्रशासन का कार्यशैली में सुस्ती आ गई. वहीं दूसरी ओर चिकित्सालय चौकी में तैनात स्टॉफ की भूमिका भी मूक दर्शक जैसी हो गई. नतीजतन दन दिनों जिला चिकित्सालय परिसर में ओपीडी से लेकर सभी वार्डों में एक बार फिर से दलालों ने अपनी घुसपैठ बना ली है. दिन हो या रात ये धड़ल्ले से मरीज के परिजनों को बरगलाकर निजी हास्पिटल्स में ले जा रहे हैं.
 नशा कारोबारी की मौजूदगी
जिला चिकित्सालय की ओपीडी क्षेत्र में बने सहायता केंद्र में कर्मचारी की मौजूदगी में ये दलाल वहां पर डटे रहते हैं. जैसे ही कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है तो ये भर्ती होने से पहले ही परिजनों को बरगलाना शुरु कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि चिकित्सालय में बद्तर उपचार होने और मरीज की मौत हो जाने का हवाला देते हुए ये उन्हें निजी हास्पिटल ले जाते हैं. मामले का काबलेगौर पहलू यह भी है कि एक ओर जहां परिसर में पहले से ही 2 दर्जन से अधिक निजी एंबुलेंस दलाल सक्रिय हैं. वहीं पिछले कुछ दिनों से एक कुख्यात नशे के कारोबारी ने भी चिकित्सालय को अपना ठिकाना बना लिया है. लगभग 5 वर्ष पहले नशे के इस कारोबारी के पुष्पराज कालोनी स्थित ठिकाने से काफी मात्रा में नशे की खेप पकड़ी गई थी. जिसके चलते साल भर फरार रहने के बाद वह पुलिस की पकड़ में आया और जेल में रहा. जहां से छूटने के बाद कुछ निजी एंबुलेंस दलालों के साथ वह अस्पताल में सक्रिय हो गया है.
चौकी स्टॉफ की भूमिका पर सवाल
जिला चिकित्सालय परिसर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए 1 प्रधान आरक्षक, 1 आरक्षक और 1 नगर सैनिक की तैनाती की गई है. परिसर में निजी एंबुलेंस दलालों की बढ़ती गुंडागर्दी को देखते हुए कुछ समय पहले कोतवाली थाना प्रभारी द्वारा चौकी स्टॉफ को सख्त निर्देश दिए जाने के साथ ही चिकित्सालय के गेट पर एक नोटिस चस्पा करा दिया गया था. जिसके जरिए निजी एंबुलेंस दलालों के परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी. लेकिन सूत्रों की मानें तो व्यवस्था में कथित तौर पर कसावट लाने के लिए की गई इस कवायद से निजी एंबुलेंस दलालों के बीच चौकी स्टॉफ की पूछ-परख काफी बढ़ गई. इतना ही नहीं बल्कि चिकित्सालय परिसर से मरीज को निजी हास्पिटल ले जाने पर प्रत्येक वाहनों से लिए जाने वाले सुविधा शुल्क में भी बढ़ोत्तरी हो गई. वहीं रात के समय अस्पताल पहुंचने वाले कोतवाली के गश्ती दल की सेवा-सुश्रुसा में खासा इजाफा हो गया

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